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Agra Shoe Industry: चीन को पड़ी ‘भारतीय जूतों’ की मार… 7500 करोड़ की लगी चोट

New Delhi: आगरा का जूता कारोबार (Agra shoe Industry) देश भर में प्रसिद्ध है। ऑनलाअन बिक्री के जरिए विदेशों में भी यहां के जूते की काफी डिमांड रहती है। इन जूतों को बनाने में इस्तेमाल किया जाने वाला रॉ मटीरियल अब तक चीन से आता था, लेकिन भारत-चीन संबंध खराब होने के बाद इसे वियतनाम से मंगवाया जा रहा है।

एफमैक अध्यक्ष पूरन डावर बताते हैं कि चीन से संबंध खराब होने के बाद से ही आगरा के जूता उद्योग (Agra shoe Industry) से चीन को समाप्त करने का मन बना लिया था। जूता मैन्युफैक्चरिंग करने के लिए रॉ मैटेरियल भी अपने देश से परचेज कर रहे हैं। जिससे अच्छी क्वालिटी के जूते तैयार किए जा सकें।

डावर ने बताया कि जूता बनाने की मशीन अभी तक चीन से आया करती थी। चीन की मशीन के जरिए जूते तैयार कर देश विदेश में भेजे जाते थे लेकिन अब इसका विकल्प वियतनाम के रूप में खोज लिया गया है। वियतनाम से अब हम जूता इंडस्ट्री के लिए मशीन परचेज कर रहे हैं। चीन के बराबर ही रेट में हमें मशीनें मिल रही हैं। ऐसे में अब हम धीरे—धीरे जूता उद्योग से चीन को समाप्त कर देंगे।

चीन से नाता तोड़ रहीं कंपनियां

उन्होंने बताया कि चीन की हठधर्मिता को लेकर वहां पर लगीं यूरोपियन कंपनियां अपना बिजनेस समेट रही हैं। इसका लाभ हमें अपने उद्योग को आगे बढ़ाने में मिलेगा। विदेशी मार्केट में हम आगे हैं लेकिन सिंथेटिक लेदर बनाने में अभी भी 80 प्रतिशत चाइना का माल सप्लाई हो रहा है। इसके खात्मे के लिए सरकार से बात की जा रही है।

गोपाल गुप्ता बताते हैं कि जूता उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए विदेशी कंपनियों को यहां लाने के लिए इंसेटिव देना होगा। चाइना के मुकाबले हम भी अपने यहां बेहतर प्रोडक्ट तैयार कर बाजार में बेच सकेंगे। आगरा में एनुअल करीब 7.5 हजार करोड़ रुपए का टर्न ओवर है। इस उद्योग से करीब तीन लाख लोगों को रोजगार मिल रहा है।

उन्होंने मांग करते हुए कहा कि रॉ मैटेरियल बनाने के लिए कम ब्याज पर ऋण उापलब्ध होना चाहिए। रिसर्च और डेवलपमेंट पर इंसेटिव सरकार को देना चाहिए। नए प्रोजेक्ट पर इनकम टैक्स कम होना चाहिए।

एक नजर
  • 150 निर्यात इकाइयां, 4500 करोड़ का प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष निर्यात
  • 5000 घरेलू कारखाने, 3000 करोड़ का टर्नओवर
  • आगरा से 65 प्रतिशत घरेलू मार्केट में होती है जूते की आपूर्ति
  • औसतन 10 करोड़ रुपये का कच्चा माल हर महीने लग जाता है

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