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Thursday, September 29, 2022

Adani Group का बड़ा बयान- NDTV Share हासिल करने के लिए इनकम टैक्स की मंजूरी जरूरी नहीं

वेबवार्ता: एनडीटीवी का शेयर (Adani Group On NDTV Share) हासिल करने के लिए आयकर विभाग (Income Tax Department) की मंजूरी जरूरी नहीं है।

इस संबंध में अडानी समूह (Adani Group Of Companies) ने एक बयान जारी किया है जिसका टैक्स एक्सपर्ट्स (Tax Experts) ने समर्थन भी किया है। अडानी समूह का मानना ​​है कि एनडीटीवी में हिस्सेदारी (NDTV Shares) हासिल करने के लिए इनकम टैक्स के अधिकारियों की मंजूरी जरूरी नहीं है और उसके ऐसा करने पर आयकर विभाग की तरफ से कोई प्रतिबंध नहीं है।

अडानी और एनडीटीवी के बीच चल रही रस्साकशी

अडानी समूह (Adani Group) ने बीते दिनों एक कम चर्चित फर्म वीसीपीएल का अधिग्रहण किया, जिसने एक दशक से अधिक समय पहले एनडीटीवी के संस्थापकों को वारंट के बदले में 403 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण दिया था और कर्ज नहीं चुकाने की सूरत में वीसीपीएल (VCPL) को समाचार समूह में 29।18 प्रतिशत हिस्सेदारी हासिल करने की अनुमति मिली थी। अब अडानी ने वीसीपीएल के इस अधिकार का प्रयोग किया है, लेकिन एनडीटीवी (NDTV) का कहना है कि इस तरह के अधिग्रहण पर आयकर अधिकारियों ने रोक लगा दी है।

अडानी ग्रुप ने दिया है ये तर्क

अडानी समूह ने एक बयान में कहा कि विश्वप्रधान कमर्शियल प्राइवेट लिमिटेड (VCPL) ने बताया कि आयकर विभाग के आदेश केवल एनडीटीवी में आरआरआरपी होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड (RHPL) के शेयरों पर लागू होते हैं और इससे किसी भी तरह वीसीपीएल को इक्विटी शेयरों का आवंटन प्रतिबंधित नहीं होता है।

समूह ने वीसीपीएल से मिले जवाब का हवाला देते हुए कहा कि आयकर विभाग के आदेश केवल आरआरपीआर के खिलाफ जारी किए गए हैं और ऐसा उक्त एनडीटीवी शेयरों पर आरआरपीआर के निरंतर स्वामित्व को सुरक्षित करने के लिए किया गया। आयकर विभाग के आदेश व्यक्तिगत रूप से प्रणय रॉय और राधिका रॉय के खिलाफ जारी नहीं किए गए हैं। इस मुद्दे पर कर विशेषज्ञों ने भी अडानी समूह का समर्थन किया है।

व्यवसायियों ने किया अडानी का समर्थन

नांगिया एंडरसन एलएलपी के पार्टनर विश्वास पंजियार ने कहा कि एनडीटीवी द्वारा अपनाई गई स्थिति आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 281 के प्रावधानों की त्रुटिपूर्ण व्याख्या पर आधारित लगती है। इसी तरह के विचार साझा करते हुए सुदित के पारेख एंड कंपनी एलएलपी की पार्टनर अनीता बसरूर ने कहा कि धारा 281 तब लागू होती है, जब किसी संपत्ति का हस्तांतरण होता है या जब किसी संपत्ति पर शुल्क लगाया जाता है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा मामले में वीसीपीएल द्वारा रखे गए वारंट को आरआरपीआरएच के इक्विटी शेयरों में परिवर्तित किया जा रहा है। यह कोई हस्तांतरण नहीं है, बल्कि लेकिन नए शेयर जारी किए जा रहे हैं। ऐसे में धारा 281 के प्रावधानों का उल्लंघन नहीं होता है।

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