Wednesday , 29 January 2020
Iran-US-War

ईरान और अमेरिका में जंग नहीं मगर जंग से कम भी नहीं

-अनवार अहमद नूर-

इराक़ की राजधानी बग़दाद में 03 जनवरी 2020 को ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी को  अमेरिकी हवाई हमले में मार दिए जाने के बाद ईरान का गुस्सा होना स्वभाविक ही बनता है उसने तुरंत ही बदला लेने की बात कह कर साफ़ कर दिया था कि वह अब ख़ामोश नहीं बैठेगा और वह बैठा भी नहीं उसने अमरीकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की तमाम चेतावनीयों के बावजूद इराक में अमेरिकी सेना के ठिकानों पर हमला कर दिया है. ईरान ने अमेरिका के सैन्य ठिकानों पर बैलिस्टिक मिसाइल से हमला किया है. इस हमले में दर्जन भर से ज्यादा बैलिस्टिक मिसाइलें दागी गई हैं.

ईरान के सरकारी टीवी चैनल प्रेस टीवी के मुताबिक इस हमले में 80 अमेरिकी सैनिक मारे जाने की खबर है. अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से तनाव चल रहा है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव की स्थिति अब जंग की तरफ तब बढ़ी जब अमेरिका ने हवाई हमले में ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया. अमेरिका के इस हमले के खिलाफ पूरा ईरान एक तरफ खड़ा हो गया, यहां तक कि इराक से लेकर दुनिया के कई देश और पूरा शिया समुदाय यूएस मिलट्री के इस कृत्य की निंदा में उतर आया है.

Ayatollah-Ali-khamenei-Iran

ईरान ने साफ कह दिया कि वो कासिम सुलेमानी की मौत का कड़ा इंतकाम लेंगे.वो युद्ध नहीं चाहते मगर बदला लिया जाएगा. इस उद्घोषणा के साथ ही ईरान ने कासिम सुलेमानी के शहर कोम में एक मस्जिद पर लाल झंडा लहराकर युद्ध के संकेत दे दिए. इतना ही नहीं, कासिम सुलेमानी को दफनाने से पहले ईरान ने एक्शन लेना शुरू कर दिया. ईरान ने सबसे पहले इराक की राजधानी बगदाद में अमेरिकी दूतावास के नजदीक दो दिन तक हमले किए. दूतावास के क्षेत्र यानी ग्रीन जोन में रॉकेट दागे गए, ईरान की इस कार्रवाई के बीच डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से लगातार धमकियां आती रही हैं. ट्रंप ने यहां तक कह दिया कि अगर ईरान ने कुछ किया तो वह उसकी सांस्कृतिक धरोहरों को भी तबाह कर देगा.

मिलिट्री बेस पर हमले के बाद डोनाल्ड ट्रंप ने ट्वीट में लिखा, ‘ऑल इज वेल. इराक में  हमारे दो सैन्य ठिकानों पर ईरान ने मिसाइलें दागी हैं. नुकसान का आकलन किया जा रहा है. अब तक सब ठीक है. हमारे पास दुनिया में की सबसे शक्तिशाली और बेहतर सेना है. मैं कल सुबह बताऊंगा.’

 ट्रंप की इस सधी प्रतिक्रिया के बाद ईरान ने भी अपना बयान जारी कर दिया है. ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ ने कहा है कि हम नियमों के तहत अपने बचाव में कार्रवाई कर रहे हैं. हम युद्ध नहीं चाहते हैं लेकिन हम किसी भी प्रहार से खुद को बचाएंगे और जिन सैन्य बेस से हमारे नागरिकों और सीनियर अफसरों को निशाना बनाया गया है. यानी ईरान न सिर्फ अटैक कर जवाब दे रहा है, बल्कि वह खुलेआम अपने एक्शन को स्वीकार भी रहा है. जबकि दूसरी तरफ डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सैन्य ताकत बताकर ईरान के खिलाफ सख्त एक्शन के बयान दे रहे हैं. हालांकि, अमेरिका ने ईरान के विदेश मंत्री जवाद जरीफ को वीजा न देकर उनके UN समिट में आने पर ब्रेक लगा दिया है, लेकिन मिलिट्री एक्शन के जरिए ईरान ने अमेरिका को आघात पहुंचाना शुरू कर दिया है, जिसे उसका बदला माना जा रहा है उधर अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पिओ ने अपने ताजा बयान में कासिम सुलेमानी को मार गिराने के फैसले को सही बताया है. उन्होंने कहा कि कासिम सुलेमानी की हत्या करके अमेरिका ने सही किया है पूरी दुनिया में अमेरिका और ईरान की इस अघोषित जंग को लेकर प्रतिकिर्याएं हो रही हैं क्योंकि माना जा रहा है कि इसका प्रभाव पूरी दुनिया में पड़ेगा,भारत सहित खाड़ी देशों को झेलना पड़ेगा ,पल पल क्या होने वाला है यह कोई नहीं जानता, दुनिया क्या एक और विश्व युद्ध की और बढ़ चुकी है? जो सिर्फ और सिर्फ तबाही बर्बादी का सन्देश है.

अमेरिका और ईरान टकराव : कब और क्या? एक नज़र में

8 अप्रैल 2019: वॉशिंगटन ने ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर को ‘‘आतंकवादी” समूह घोषित किया. उसका कुर्द बल भी ब्लैक लिस्ट में है.

5 मई 2019: व्हाइट हाउस के राष्ट्रीय सलाहकार जॉन बोल्टन ने पश्चिम एशिया में अपने एक विमान वाहक और एक बमवर्षक बल की तैनाती की घोषणा की.

8 मई 2019: अमेरिका के अंतरराष्ट्रीय 2015 समझौते से बाहर होने, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंकुश लगाने और प्रतिबंधों को फिर से लागू करने के एक साल बाद तेहरान ने परमाणु कार्यक्रम वापस शुरू करने की धमकी दी. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के इस्पात और खनन क्षेत्रों पर प्रतिबंध लगाए.

ट्रंप को महाभियोग की चुनौती पेश करने वाला साल रहा 2019

12 मई 2019: खाड़ी में रहस्यमय हमले में तीन तेल टैंकर सहित चार नौकाएं क्षतिग्रस्त हुईं. अमेरिका ने ईरान पर इसका आरोप लगाया.

25 मई 2019: अमेरिका ने कहा कि वह 1500 अतिरिक्त सैनिकों को पश्चिम एशिया में तैनात करेगा जिससे कि ईरान से उत्पन्न खतरों से निपटा जा सके.

13 जून 2019: दो टैंकरों (नॉर्वे और जापान के) पर ओमान की खाड़ी में हमला. वाशिंगटन, लंदन और रियाद ने ईरान पर आरोप लगाया, जिसने संलिप्तता से इनकार किया.

20 जून 2019: ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड ने कहा कि उसने होर्मुज के जलडमरूमध्य के पास ईरानी हवाई क्षेत्र का उल्लंघन कर रहे अमेरिकी ड्रोन को गिराया. ट्रंप ने जवाबी हमले का आदेश दिया, लेकिन आखिरी क्षण में उसे खारिज कर दिया.

24 जून 2019: डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के शीर्ष नेता आयतुल्लाह अली खमनेई और वरिष्ठ ईरानी सैन्य नेताओं पर कड़े वित्त प्रतिबंध लगाने की घोषणा की.

18 जुलाई 2019: ट्रंप ने कहा कि होर्मुज के जलडमरूमध्य में खतरनाक तरीके से उनकी नौकाओं के पास आए ईरानी ड्रोन को अमेरिकी सेना ने मार गिराया.

14 सितम्बर 2019: यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा किए गए हवाई हमलों में सऊदी के दो प्रमुख तेल प्रतिष्ठानों में आग लग गई. तेहरान ने अमेरिका और अन्य ताकतों पर संलिप्तता का आरोप लगाया, लेकिन उन्होंने इसे खारिज कर दिया.

20 सितम्बर 2019: ट्रंप ने ईरान के केंद्रीय बैंक को नुकसान पहुंचाने वाले ‘‘ किसी देश पर लगाए गए सबसे बड़े प्रतिबंधों” की घोषणा की.

7 नवम्बर 2019: तेहरान ने 2015 परमाणु समझौते का चौथी बार उल्लंघन कर अपने भूमिगत फोर्डा संयंत्र में यूरेनियम संवर्धन का काम शुरू कर किया.

29 दिसंबर 2019: अमेरिका ने इराक में ईरान समर्थित एक समूह पर हवाई हमले किए, कम से कम 25 लड़ाके मारे गए. ये 27 दिसंबर को इराक में अमेरिकी हितों पर किए रॉकेट हमलों का जवाब था

31 दिसंबर 2019: हमले से नाराज ईरान समर्थक प्रदर्शनकारियों ने बगदाद में अमेरिकी दूतावास परिसर में हमला बोल दिया. ट्रंप ने ईरान को इसकी ‘‘बड़ी कीमत चुकाने” की धमकी दी.

3 जनवरी 2020: अमेरिकी हवाई हमले में ईरान के शीर्ष कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत हो गई. पेंटागन ने कहा कि बगदाद में अमेरिकी दूतावास पर हुए हमले के बाद राष्ट्रपति ट्रंप ने इसके आदेश दिए थे.

7 जनवरी 2020: रिवोल्यूशनरी गार्ड के अगुवा हुसैन सलामी ने कहा ईरान इसका ‘‘बदला लेगा” .

8 जनवरी 2020: ईरान ने इराक स्थित ऐसे कम से कम दो सैन्य अड्डों पर एक दर्जन से अधिक बैलिस्टिक मिसाइल दागी जहां अमेरिकी सेना और उसके सहयोगी बल ठहरे हुए थे.

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