online fraud

ऑनलाइन ठगों से सख्ती से निपटना होगा

-योगेश कुमार सोनी-Yogesh Kumar Soni

ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले हर रोज नए तरीके खोज कर लोगों को लूट रहे हैं। जब तक लोग इनके पुराने तरीके को समझकर सचेत होते हैं तब तक यह नया तरीका निकाल लेते हैं। इस बार एक और ऐसा तरीका निकाला है जिससे पैसा मांगने वाले को भी नही पता चल रहा कि उसने किसी से उधार भी लिया है। दरअसल मामला यह है कि हैकर्स आपकी फेसबुक आईडी को हैक करके आपसे जुडे किसी साथी से गूगल-पे,पेटीएम या अन्य किसी भी वॉलेट में पैसे मांगने के लिए कहते हैं। हैकर्स आपकी आईडी पर इतनी रिसर्च कर चुका होता है कि उसको भलिभांति पता होता है कि किससे पैसे मांगने है और किससे नही।

दरअसल इस घटना को लेकर सबसे बड़ा दुर्भाग्य यह कि इस मामलें में पुलिस बहुत ज्यादा कुछ कर नही पाती। लाखों में किसी एक केस में ही आरोपी पकडे जाते हैं और वो भी कोई हाई-प्रोफाइल केस होता है तब। और शायद यही कारण है कि हैकर्स के हौसले इतने बुलंद हो चुके हैं कि वो ऐसे फ्रॉड करने से कतई भी नही कतराते। यह तो आर्थिक धोखेबाजी है जिस पर पुलिस कुछ नही करती यदि किसी के अकाउंट से कोई किसी को जान से मारने की धमकी या कोई देशद्रोही गतिविधि करते तो क्या प्रशासन उस पर भी विश्वास नही करेगा। यदि ऐसी कोई घटना भी सामने आ जाए तो पुलिस कार्रवाई के नाम पर इतना परेशान करेगी की जैसा आप बहुत बड़े आतंकवादी हो और इसके बाद आप आसानी से अपनी जान भी नही छुडा सकते। उदाहरण के तौर पर यदि कोई जानबूझ कर काम ऐसा काम कर दे तो कैसे साबित हो। ऐसे मामलों में गंभीरता दिखाते हुए प्रशासन को मुस्तैदी से काम करने की जरुरत है चूंकि प्रमाणिकता का खेल को समझने की प्रणाली की सरलता से ही कोई भी केस समझा जा सकेगा।

साइबर एक्सपर्ट्स के अनुसार कई तरह से फेसबुक आईडी हैक हो सकती है लेकिन आजकल सबसे ज्यादा आसान तरीका है यह है जो लोग इस तरह के एपों पर क्लिक जैसे कि ‘आप पिछले जन्म क्या थे’ व ‘आपकी शक्ल किस सेलेब्रिटि से मिलती’ अन्य  आदि इस तरह की बातें। इस तरह के एप के लिंक पर क्लिक करते ही आपकी सारी डिटेल ऐसे प्लेटफॉम पर आ जाती है जिससे हैकर्स अपने तकनीकी तरीके से देख लेते हैं। दरअसल ऑनलाइन फ्रॉड करने वाले करने वाले अलग-अलग तरीके से धोखा करते रहते हैं और जैसे ही लोग इनके तरीके से वाकिफ होते हैं तब तक यह एक और ऐसा तरीका निकाल लेते हैं कि जिसमें लोग आसानी से इनके झांसे में आ जाते है।

पिछले वर्ष आरबीआई की गाइडलाइंस जारी हुई थी यदि ग्राहक किसी भी बैंक साइट या लिंक्ड मर्चेंट वेबसाइट से धोखा खाता है बैंक को अपने ग्राहक पूरा पैसे लौटाना होगा। साथ ही यह भी कहा था कि ग्राहक किसी से भी अपना ओटीपी पिन, सीवीवी नंबर या बैंक की किसी भी प्रकार की जानकारी किसी को भी न बताएं। लेकिन जब तक यह आदेश जारी हुए तो तब तक को देश में लाखों लोगों को करोडों का चूना लग चुका था और इसके बाद भी जिन लोगों ने इसकी शिकायते दर्ज कराई थी उनको बैंकों से किसी भी प्रकार से सहायता नही मिली थी। इसमें अशिक्षित के साथ शिक्षित लोग भी चपेट में आए थे। जज से लेकर बड़े पुलिस अधिकारी तक इसका शिकार हुए थे। फ्रॉड करने वालों के पास तरीके तो बहुत हैं लेकिन लोगों पर बचने के लिए विकल्प बहुत कम। क्या इस तरह का साइबर क्राइम करने वालों के लिए शासन-प्रशासन के पास कोई ठोस नीति नही है या हैकर्स के पास पुलिस से भी ज्यादा हाईटैक तरीका है जिससे वह आसानी से बच निकलते हैं।

बहराहल मामला चाहे कुछ भी लेकिन अंत में यही बात समझ में आती है कि सुरक्षा ही बचाव है। इसके लिए अधिक से अधिक, लोगों को इसके बारे में चेताने के लिए जागरुक होना पडेगा और यह काम मीडिया व सरकार द्वारा विज्ञापन या जागरुक कार्यक्रम करके किया जाना चाहिए। सोशल साइटों से जुडना गलत नही हैं चूंकि आज फेसबुक,व्हाट्स एप,ट्वीटर व इंस्टाग्राम पर हर कोई जुडा है लेकिन इन आने वाले फालतू के एपों पर जिन पर लोग मनोरंजन करते हैं उनसे बचने की जरुरत है।

पिछले कुछ समय में कुछ ऐसी घटनाएं भी सामने आई हैं कि जो लोग छुट्टियां बीताने या अन्य किसी भी कार्य के लिए कुछ दिनों बाहर जाते हैं तो उनके घर में सबसे ज्यादा चोरियां हुई। और जब ऐसे घटनाओं की जांच हुई तो चोरो ने बताया कि वह फेसबुक या अन्य सोशल साइट के जरिये रैकी करके ऐसे घरों को शिकार बनाते थे जो लोग घर पर नही हैं और चोरों का इस बात पता तब चलता था जब ऐसे लोग अपनी फोटो सोशल साइट पर डालते थे। इसके अलावा भी तमाम ऐसे तरीके हैं जिससे यह लोग घटनाओं को अंजाम दे रहे हैं। आजकल बैंको में सबकुछ ऑनलाइन हो रहा है और लोग इसका प्रयोग भी कर रहे हैं लेकिन यह बात भी सच है अधिकतर लोग ऑनलाइन बैंकिंग का प्रयोग नही करना जानते और बैंक के कर्मचारी उन पर दबाव बनाते हैं जिस वजह से भी कई बार फ्रॉड के मामले देखें गए हैं।

बहरहाल,स्पष्ट है कि आप जहां एक ओर सोशल साइटों व एपों का फायदा हुआ है वहीं नुकसान भी हो रहा है लेकिन समझदार व्यक्ति जागरुक रहकर अपनी सुरक्षा कर सकता है। आज की हाईटैक दुनिया में कदम-कदम पर चुनौतियां है। साइबर क्राइम के लिए पुलिस बेहतर काम करने की बात हमेशा कहती है लेकिन उनकी संचालन प्रक्रियो को देखकर लगता है कि अभी तनकीनियों को अपनाते हुए और हाईटैक होने की जरुरत है। चोर को तब ही पकडना आसान होता है जब हम उससे दो कदम आगे हों वरना यह सिलसिला चलता रहा तो परेशानी बढ़ सकती है। यदि आपके कोई भी सोशल एप पर कोई किसी भी प्रकार की मदद मांगता है तो कॉल करके सीधे फोन करें जिससे किसी भी प्रकार की फ्रॉड करने की गुंजाइश ही न बचे।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार है)

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