Wednesday , 29 January 2020
JNU-Attack

जलियांवाला बाग़ बनाम जामिया व जेएनयू प्रकरण!

ज़िम्मेदार कौन और कैसे मिलेगा न्याय?

-अनवार अहमद नूर-

जिस तरह से जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के हॉस्टल में कल रविवार की शाम को हमलावरों के एक समूह ने गुंडागर्दी, हिंसा, का तांडव किया जिसमें दर्जनों छात्र घायल हुए हैं जिनमें कई की हालत गंभीर और चिंता जनक बनी हुई है और वह अस्पताल में भर्ती हैं उस पर पूरे देश से प्रतिक्रयाएं आई हैं और जहां अनेक स्थानों पर इस गुंडागर्दी और हमले को कानून व्यवस्था और सरकार की असफलता करार देते हुए कहा गया है कि वह संविधान और देश की जनता के विरुद्ध जाकर, पक्षपाती और सांप्रदायिक भेदभाव बरत रही है और उसका साथ कुछ तत्व इस सीमा तक दें रहें हैं कि वह लाठी, डंडो, गुंडई से आवाज़ को मार देना चाहते हैं। जेएनयू में जो हमला किया गया वह इसका एक उदाहरण है। इसकी तुलना जलियांवाला बाग के समान ही करते हुए इसे जेएनयू वाला हॉस्टल कांड कहा गया है।

बता दें कि विद्यार्थियों पर जुल्म का यह सिलसिला पिछले काफी समय से चल रहा है और यह कभी जेएनयू में होता है तो कभी अलीगढ़ मुस्लिम विश्विद्यालय पहुंच जाता है। तो कभी जामिया मिल्लिया आ जाता है और फिर जेएनयू में आ जाता है। पिछले दिनों जामिया मिलिया इस्लामिया में लाइब्रेरी और कैंपस में घुसकर दिल्ली पुलिस ने हिंसा और लाठी, गोले बरसाए थे और आंसू गैस छोड़े थे, जिसको देखकर इसे पुलिस और वर्तमान सरकार की बर्बरता वाला कांड कहा गया, तभी से वहां लगातार जामिया मिलिया इस्लामिया की छात्राओं और छात्रों तथा समर्थक महिलाओं ने अपना धरना और प्रदर्शन जारी रखा है जिसको 25 दिन गुजर चुके हैं।

JNU Students Protest

इसको जारी रखते हुए लोगों ने इसको जामिया वाला शाहीन बाग कहा है और यहां पर विभिन्न नाटक और तस्वीरों के माध्यम से अंग्रेजों की बर्बरता वाला जलियांवाला बाग लगातार प्रदर्शित किया जा रहा है, जिसमें जनरल डायर ने भारतीय स्वतंत्रता के समर्थक लोगों पर ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर उनको शहीद कर डाला था। ठीक ऐसा ही दिल्ली पुलिस ने जामिया के कैंपस और लाइब्रेरी में घुसकर पढ़ रहे छात्रों पर हिंसा का तांडव किया और उन पर आंसू गैस के गोले दागे, जिससे एक छात्र की आंख तक समाप्त हो गयी। यह सब कुछ अभी चल ही रहा था की कल रविवार को जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के कैंपस में घुसकर कई दर्जन गुंडों ने छात्रों और छात्राओं पर हमला बोला जिसमें दर्जनों छात्र गंभीर रूप से घायल हुए हैं। छात्र संघ की अध्यक्षा आईशी घोष और कई प्रोफेसर तक घायल हुए हैं।

गुंडों ने बाकायदा सुनियोजित तरीके से कैंपस में घुसकर छात्र-छात्राओं पर लाठी, डंडों व लोहे के सरियों और बड़े-बड़े पत्थरों से हमला किया। इस हमले की विशेषता यह रही कि जब तक यह हमला चलता रहा दिल्ली पुलिस गेट के बाहर खड़ी मूकदर्शक बनी रही। इसके अलावा लगभग 90 से अधिक पुलिस को कॉल करने के बावजूद और सहायता मांगने की गुहार लगाने के उपरांत भी दिल्ली पुलिस सहायता को नहीं गई और जब गुंडे अपना काम करके निकल गए तब दिल्ली पुलिस अंदर कैंपस में गई इसके अलावा इस हमले की एक खासियत यह भी रही कि गेट के बाहर आसपास के और कुछ ऐसे लोग उपस्थित रहे जो इस गुंडागर्दी और हमले के समर्थन में भारत माता की जय के नारे लगाते रहे और इन्होंने कुछ ऐसे कार्यों को अंजाम दिया जो शर्मनाक ही नहीं बल्कि इस मामले को षड्यंत्रकारी साबित करने के संकेत दें रहे हैं।

दिल्ली पुलिस मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन

यह कितने आश्चर्य की बात है कि जेएनयू के मुख्य गेट पर तैनात पुलिस और कुछ गुंडा समर्थक तत्वों ने स्वराज इंडिया के योगेंद्र यादव पर न सिर्फ अभद्र व्यवहार किया बल्कि उनके ऊपर हमला भी किया और पुलिस के साथ-साथ मीडिया को भी तब तक गेट के अंदर प्रवेश की आज्ञा नहीं मिली जब तक की गुंडा तत्व अपना काम करके न जाने कहां गायब नहीं हो गए अंदर दिल्ली पुलिस को एक भी अपराधी मौका ए वारदात से नहीं मिला। पूरे देश में इस पर प्रश्न और चर्चाएं होने लगी हैं और इस घटना के लिए दिल्ली पुलिस कमिश्नर से लेकर गृह मंत्रालय तक जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। कल रात ही दिल्ली पुलिस मुख्यालय आईटीओ पर जब छात्र छात्राओं का एक प्रदर्शन रात्रि 2:00 बजे तक चला और इन्होंने मांग रखी कि “आर हो या पार हो” “आज गुंडों पर एफआईआर हो” तब जाकर अब पुलिस ने एफआईआर तो दर्ज कर ली है, लेकिन कुछ लोगों को यह आशा नहीं है कि इसमें कुछ होगा क्योंकि जो दिल्ली पुलिस गेट पर तैनात रहते हुए कुछ नहीं करती। पुलिस अधिकारी, विश्वविद्यालय के अधिकारी एक मिले-जुले आधार पर चुपचाप कई घंटों तक हिंसा का तांडव चलने देते हैं वह बाद में कुछ करेंगे इस पर अधिकांश लोगों की राय नकारात्मक ही है।

खुद दिल्ली पुलिस के वकील ने भी जेएनयू की हिंसा पर की निंदा की है, साथ ही दिल्ली पुलिस के बर्ताव पर सवाल उठाए हैं। राहुल मेहरा ने ट्विटर पर लिखा है कि उनका सिर शर्म से झुक रहा है। उन्होंने लिखा कि दिल्ली पुलिस का वकील होने के नाते मेरा सिर शर्म में झुका जा रहा है, जो वीडियो मेरे सामने आए हैं, उनमें छात्रों को मारा जा रहा है, प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाया जा रहा है। ऐसे में हमारी दिल्ली पुलिस की फोर्स कहां पर है? पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने तो इसे सरकार का फासीवादी सर्जिकल स्ट्राइक करार दिया है। नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता कैलाश सत्यार्थी ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में हिंसा पर दुख जताते हुए कहा कि जेएनयू में नक़ाबपोश उपद्रवियों द्वारा की गई हिंसा बेहद दुखद है। यदि जामिया व जेएनयू के छात्रावासों में हमारी बेटियां सुरक्षित नहीं हैं, तो इससे ज़्यादा शर्मनाक बात नहीं हो सकती। हमलावर जो भी हों, छात्र नहीं हो सकते। देश के सभी छात्र संगठन हिंसा का विरोध करें।

अब देखना यह है कि जलियांवाला बाग जैसे बर्बर कांड से जामिया वाला शाहीन बाग आंदोलन और अब जेएनयू में यह हॉस्टल में हिंसा और बर्बरता का तांडव क्या न्याय दिला पाएगा, और जिस सीएए कानून तथा देश में अन्याय और पुलिस बर्बरता के विरुद्ध, देश के लोग इतना कुछ कर रहे हैं इनको आज़ादी और न्याय मिल पायेगा?

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