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जब तक फांसी नहीं होगी तब तक चैन नहीं पड़ेगा : निर्भाया की मां

निर्भया केस एक उलझा हुआ मामला है, आखिर कब होगी दोषियों को फांसी? कैसे दोषी खेल रहे हैं सिस्टम से! फिलहाल एक दोषी मुकेश ने ही राष्ट्रपति के पास दया याचिका लगाई जिसे खारिज कर दिया गया। इसके चलते ट्रायल कोर्ट ने अब 22 जनवरी के डेथ वारंट को रद्द कर 01 फरवरी की तारीख दी है। अभी विनय, अक्षय और पवन ने दया याचिका नहीं लगाई है। अक्षय और पवन ने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव याचिका भी दाखिल नहीं की है। यानी तीन दोषियों के पास राष्ट्रपति के पास दया याचिका का संवैधानिक अधिकार मौजूद है। जबकि दो दोषियों के पास क्यूरेटिव याचिका का आखिरी कानूनी उपचार बाकी है। इस पूरे घटनाक्रम से संघर्ष करने वाली निर्भया की मां आशा देवी से वरिष्ठ पत्रकार योगेश कुमार सोनी से एक्सक्लूसिव बातचीत के मुख्य अंश…

निर्भया के दोषियों को फांसी की सजा सुना दी गई। अब आपको कैसा कैसा लग रहा है?

सात साल से इस फैसले का इंतजार कर रही हूं। मेरे सपनों में मेरी बेटी रोजाना आकर पूछती है कि मां कब तक मुझे इंसाफ मिलेगा? इस निर्णय से पहले मेरे पास कोई जबाव नही होता था लेकिन अब वो मेरे से पूछेगी तो कह दूंगी बेटा तेरा इंसाफ होने वाला है। लेकिन जब तक उनको फांसी नही होगी तब तक न मेरी बेटी की आत्मा को चैन पड़ेगा और न ही मेरे दिल को सूकून।

क्या आपको लगता है कि इस मामले में फैसले में ज्यादा समय लाग गया?

ऐसे घिनौघे अपराध के बाद मुझे लगा था कि तुरंत फैसला आएगा और सभी दोषियों को फांसी दे दी जाएगी लेकिन सात वर्षों से भी ज्यादा तक इंतजार करना पड़ा। इतने बड़े मामलें को कोर्ट को जल्द फैसला देना चाहिए जिससे कोई भी लड़की या महिला का जिंदगी खराब करने से पहले हजार बार सोचे।

Nirbahaya Case

दो दोषी, विनय और मुकेश ने क्यूरेटिव पिटिशन यानी सुधारात्मक याचिका दाखिल की है। कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई की तारीख 14 जनवरी तय की है। यदि ऐसा हुआ तो आप क्या करेंगी?

जैसा कि आप जानते हैं कि इस केस में कुल 6 आरोपी थे। मुख्य आरोपी रामसिंह ने जेल में ही फांसी लगा ली और एक नाबालिग होने की वजह से बच गया। बाकी चारों में से यदि किसी को कोई जरा सी भी रियाअत मिल जाती है तो मेरी बेटी के साथ इंसाफ नही होगा। इस घिनौघे अपराध के बाद तो नाबालिग को भी मौत की ही सजा देनी चाहिए। क्या आपको लगा है कि समाज में ऐसे दरिंदों को रहने का कोई हक है? आरोप सिध्द होने के बाद तुरंत मौत दे देनी चाहिए।

यह खतरनाक सफर कैसे कटा? कुछ उतार-चढाव के बारे में बताइए।

यदि किसी की बहन-बेटी का साथ ऐसा हो जाए तो वह हर रोज मर के जीता है। मैंने और मेरे परिवार के हर सदस्य ने जिंदगी जीने से मुंह तो मोड़ लिया था लेकिन दुनिया ने मुझे हौसला दिया। जिंदगी एक बोझ सी बन जाती है। रेप जैसे मामलों में तुरंत फैसला आ जाए तो अच्छा होगा। भगवान न करे कि किसी बच्ची के साथ ऐसा हो। कई बार हमें लगता है कि हम जी ही क्यों रहे हैं। बस अब तो भगवान से यही प्रार्थना है कि जल्दी से बिना रुकावट इन दरिदों को फांसी पर चढ़ाया जाए।

इस पूरे मामलें आपकी किस-किस ने सहायता की?

मैं किस किस का नाम लूं? मेरे साथ तो पूरा देश खडा था। देश के कोने-कोने से आए मीडिया व एनजीओ के लोगों ने मुझे हौसला दिया। हम तो गरीब आदमी हैं केस लड़ने की तो छोडो किराए तक के पैसे नही थे। पुलिस ने भी केस में अच्छे से अपनी भूमिका निभाई। सभी का दिल से धन्यवाद। पूरे देश मेरा परिवार जैसा लगता है।

Yogesh-Soni

 

(योगेश कुमार सोनी वरिष्ठ पत्रकार है)

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