feroz khan arjun

महाभारत की शूटिंग का हर दिन पिकनिक की तरह होता था : अर्जुन (फिरोज खान)

लॉकडाउन के चलते एक बार फिर महाभारत व रामायण के अलावा अन्य बाकी सभी पुराने क्रार्यक्रमों को Yogesh Kumar Soniदर्शक पहली की तरह प्यार दे रहे हैं। इन कार्यक्रमों में काम करने वाले सभी पात्रों में कुछ फिल्मी दुनिया में चले गए तो कुछ राजनीति में तो बाकी टीवी की दुनिया से अलविदा ले गए थे। इन कार्यक्रमों में जिन लोगों ने रोल किए हैं, दर्शकों को उनके बारे में जानने की जिज्ञासा बनी हुई है कि वो क्या कर रहे हैं। लोगो का मानना है कि हर किरदार अमर हो गया। महाभारत में अर्जुन का पात्र निभाने वाले अभिनेता ने उस समय अपने किरदार में जलवे बिखरते हुए वाह-वाही लूटी थी। फिल्मों दुनिया में भी कभी विलेन तो कभी हीरो बनकर प्रशसकों दिल पर हमेशा राज किया। महाभारत में अर्जुन के रोल को जीवंत करने वाले फिरोज खान यानि अर्जुन से योगेश कुमार सोनी की तमाम मुद्दो पर अहम चर्चा हुई। पेश है कुछ मुख्य अंश…

क्या आपने कभी कल्पना की थी कि रामायण व महाभारत को दोबारा इतना प्यार मिलेगा?

जब इन कार्यक्रमों को बनाया जा रहा था तो सभी पात्रों को पैसे कमाने का लालच या दस चीजों का एक साथ करने की चिंतानहीं होती थी क्योंकि ऐसे धार्मिक कार्यक्रमों में काम करना सौभाग्य कि बात होती थी और आजकल की तरह कलाकारों ने कई जगह पैर नहीं फसा रखे होते थे। यदि मैं अपने किरदार मतलब अर्जुन की बात करुं तो इसके लिए तेईस हजार से ज्यादा छोटे बड़े कलाकारों ने ऑडिशन दिया था लेकिन सेलेक्ट मुझे किया गया था जिसको मैं अपने सौभाग्य समझता हूं।जबकि मैं इससे पहले कुछ फिल्मों में काम भी कर चुका था। भहाभारत के हर एपिसोड को हमने उसके किरदार में डूबकर शूट किया है। यदि दर्शक वो सीन दिल से न जिये तो हम काम सफलनहीं मानते थे। हर दृश्य को ऐसे समझते थे कि हम स्वंय वही हैं। शायद यही कारण है कि लोग आज भी इतना प्यार दे रहे हैं।

नई पीढी भी आपको उतना ही पसंद कर रही है जितना पहले के लोगों ने किया जबकि उन्होनें तो अन्य डारेक्टर/प्रोड्यूसर द्वारा बनाई गई महाभारत भी देखी है।

जो काम सच्चे दिल से किया हो वो हमेशा पसंद किया जाएगा। आजकल नए डारेक्टर/प्रोड्यूसर कई चीजों में कुछ नया करने के चक्कर में बदलाव करना चाहते हैं लेकिन हम हमेशा कहते हैं शास्त्रों व इतिहास के साथ कभी भी छेडछाड न करें। जरा सी बात बदलते ही उस घटना का पूरा अर्थ बदल जाता है। बीआर चोपड़ा की महाभारत एक तपस्या है। उसके जैसी महाभारत बननी संभवनहीं है चूंकि उसमें काम किए हर किरदार ने पात्रों में डूब कर काम किया है। हम लोग पात्र को जिया करते थे।

आपके तमाम दोस्तों ने बताया कि शूटिंग के दौरान सबसे ज्यादा आप शरारत करते थे। क्या यह बात सच है?

जी हां सही सुना है। रवि चोपड़ा सर मुझे बहुत प्यार करते थे लेकिन सेट पर बहुत सख्त होते थे। किसी भी बात का उल्लघन करने पर जुर्माना तय किया हुआ था और पूरी महाभारत में सबसे ज्यादा जुर्माना मैंने दिया है। शायद ही कोई ऐसा एपिसोड जिसमें मुझे फाइन न लगा हो। इस बात पर मैंने रवि सर को कहा था कि आप बहुत फाइन डारेक्टर हो। उन्होनें पूछा कैसे?तो इस पर मेरा उत्तर था कि आप सबसे ज्यादा फाइन काटते हो। वो यह सुनकर बहुत हंसे थे।

शूटिंग के दौरान घटी कोई सबसे हास्यप्रद घटना बताइये?

दरअसल हर रोज मस्ती का माहौल होता था और सभी बहुत ठंडे दिमाग से काम करते थे तो ऐसा लगता था कि मानो हम लोग शूटिंग परनहीं पिकनिक आए हों। वैसे तो तमाम किस्से हैं लेकिन एक बार हम शूट कर रहे थे तो ब्रेक के दौरान हम कुछ लोग चाय पी रहे थे तभी कुछ अंग्रेज लोग आए और वो रवि चोपड़ा सर के बारे में पूछ रहे थे और उनमें से एक बोला ‘वेयर एज मिस्टर चोपडी’…जिस पर मुझे बहुत तेज हंसी आई और मैं रवि सर के पास जाकर बोला मिस्टर चोपडी आपसे मिलने कुछ लोग आए हैं। वो मुझे देखकर बहुत अजीब सी प्रतिक्रिया दे रहे थे लेकिन जब उन्होनें वहां देखा तो अंग्रेज लोग खडे थो और वो उन्हें मिस्टर चोपडी कह रहे थे।तब तो बात आई-गई हो गई लेकिन कुछ देर बाद रवि सर का अस्सिटेंट आया और बोला इस जुर्माने वाली पर्ची पर साइन कर दो आपको एक हजार रुपये का फाइन लगा है। मैने कहा किस बात का तो उसने कहा सर आपने सर का नाम बिगाडा है,चोपड़ा को चोपडी बोला है लेकिन मैंने कहा कि वो तो अंग्रेज लोग बोल रहे हैं मैंने तोनहीं कहा। अंत में मुझे जुर्माना भरना ही पड़ा। मेरी तो सारी कमाई मानो जुर्माने में चली जाती थी। जुर्माने के पैसों से हम पार्टी करते थे।

आप रवि चोपड़ा को इतना परेशान करते थे तो कभी आपको उन्होनें कार्यक्रम से बाहर निकालने के लिएनहीं कहा?  

परेशान मतलब मस्ती होती थी। वो मुझे बहुत प्यार करते थे। हमेशा अपना छोटा भाई माना है। यदि मैं कुछ देर किसी के साथ छेडछाड न करुं तो सब मेरे पास आकर कहते थे कि आज इतना शांत क्यों है? मतलब मस्ती करना तो मेरी मजबूरी हो गई थी। बीआर चोपड़ा और रवि चोपड़ा दोनों की निगाह इतनी पैनी थी कि वो अपनी किसी भी फिल्म या कार्यक्रम में पारखी निगाह से देखकर ही काम देते थे। इसके अलावा उनकी सबसे अहम विशेषता थी कि वो किसी को कमजोरनहीं आंकते थे। चोपड़ा परिवार ने कई लोगों की जिंदगी बनाई है और अपनी टीम को परिवार माना है।

आपका नाम अर्जुन कैसे पड़ा और आपने दोबारा किसी भी धार्मिक रोल को करने से मना क्यों कर दिया था?

यदि मैं किसी भी धार्मिक नाटक में काम करता तो लोग मुझे किसी और पात्र की भूमिका मेंनहीं स्वीकारते क्योंकि पूरे देश की निगाह में मैं अर्जुन ही बन गया था और मैं दोबारा एक जैसा काम करने में विश्वास भी नहीं रखता। मैंनें अपने करियर में 260 से ज्यादा फिल्में की हैं। जिसमें अलग-अलग तरह के रोल किए हैं। दरअसल मामला यह था कि महाभारत के पटकथा और संवाद लेखक डॉ. राही मासूम रजा सर ने मुझसे कहा था हजारों लोगों के बाद तुम्हारा, अर्जुन के पात्र लिए सेलेक्शन हुआ है तो अब तुम्हारा नाम अर्जुन ही होना चाहिए। तुम लगते भी अर्जुन जैसे हो और इंडस्ट्री में भी कोई इस नाम से नहीं है। अर्जुन नाम ने मुझेस बहुत कुछ दिया है जिसका मैं हमेशा ऋणी रहूगां।

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