सर्द रातों में भी सीएए और एनआरसी के विरोध में सड़क पर डटीं हैं शाहीन बाग की महिलाएं

नई दिल्ली, 18 जनवरी (इरशान सईद)। नागरिकता संशोधन कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और एनपीआर के खिलाफ सर्द रातों की परवाह के बिना महिलाएं, बच्चे, बुजुर्ग और युवा पिछले एक महीने से दिनरात शाहीन बाग में आंदोलन कर रहे हैं। इनके गालों पर तिरंगे की पेंटिंग, हाथों में तिरंगा, जुबां पर देशभक्ति के गाने, संविधान बचाने, समानता और हिंदुस्तान जिंदाबाद के नारे शाहीन बाग की सड़कों पर गूंज रहे है। राष्ट्रीय राजधानी में 15 दिसम्बर को नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान जामिया परिसर में घुसकर पुलिस की बर्बता के खिलाफ शाहीन बाग की महिलाओं ने मथुरा रोड को नोएडा से जोड़ने वाली कालिंदी कुंज मार्ग के बीचों बीच आंदोलन शुरू कर दिया। इस आंदोलन का नेतृत्व भी महिलाएं कर रही है।

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इन महिलाओं में 39 साल की तब्बसुम भी है जो नारे लगाने और भाषणों के बीच में तालियां बजाने से समय निकालकर अपनी एक साल की बच्ची की देखभाल भी कर रही है। यह पूछने पर कि क्या घर में बच्ची की देखभाल करने वाला और कोई नहीं है, तबस्सुम कहती है ‘‘अब तो यही (धरना स्थल) घर जैसा हो गया है। घर से खाना ले आती हूं और बच्चे यहीं खा लेते हैं। मुझे यहां आना अच्छा लगता है।’’ इस कड़ाके की ठंड में विरोध प्रदर्शन को पिछले 34 दिनों से अपनी रोजमर्रा की दिनचर्या का हिस्सा बना चुकी तबस्सुम जैसी कई महिलाएं अपनी मांगों को लेकर यहां डटी हुई हैं। कईयों के साथ में दूध पीते बच्चे भी हैं और स्कूल जाने वाले भी। हर कोई अपने घर से कुछ न कुछ लेकर आया है। दरी, गद्दे, रजाई, कंबल, चादर, तकिए वगैरह वगैरह। बीच बीच में बड़ी संख्या में लोग चाय और खाने पीने का सामान भी ला रहे हैं। मंच से घोषणा भी हो रही है कि प्रदर्शन में बाहर से आए हुए लोग खाना खाकर जाएं।

स्थानीय निवासी और यूपीएससी (संघ लोक सेवा आयोग) परीक्षा की तैयारी कर रही 21 वर्षीय सबा बताती है, ‘‘घर में पहले जो लोग काम में मदद नहीं करते थे, वह भी अब हाथ बंटाते हैं। हम यहां दूसरे लोगों के लिए भी चाय के अलावा खाने की चीजें बनाकर लाते हैं ताकि जिनके घरों से खाना न आए, उनको दे सकें।’’ प्रदर्शन में इतनी बड़ी तादाद में महिलाओं की भागीदारी पर सबा कहती है कि जामिया मिल्लिया में इस इलाके के कई बच्चे पढ़ते हैं और जब पुलिस ने विश्वविद्यालय में घुसकर पिटाई की तो अभिभावकों में रोष होना स्वाभाविक था, खासतौर पर महिलाओं में। इसीलिए वह जोर शोर से यहां डटी हैं। संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के विरोध में 15 दिसंबर को जामिया नगर में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद से दिल्ली-नोएडा को जोड़ने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग पर शाहीन बाग इलाके में विरोध प्रदर्शन चल रहा है। पिछले 34 दिनों से जारी इस ‘शाहीन बाग रिजिस्ट’ में रोज सैकड़ों महिलाएं परिवार और घरेलू कामकाज में सामंजस्य बैठाते हुए इसमें भागीदारी कर रही हैं।

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जामिया के एक पूर्व छात्र वकार कहते हैं, ‘‘इस विरोध से कुछ बदलेगा या नहीं, यह अभी तो नहीं कहा जा सकता, लेकिन इसने मुस्लिम महिलाओं को आंदोलित कर उनमें राजनीतिक चेतना भर दी है। इस आंदोलन की सबसे बड़ी उपलब्धि है महिलाओं का इतनी बड़ी संख्या में घर से बाहर निकल कर आना।’’ वह कहते हैं, “इस इलाके में शाम सात बजे के बाद लड़कियां और महिलाएं सड़क पर यदा कदा ही दिखती थीं लेकिन अभी देखिए, यहां सैकड़ों तादाद में महिलाएं हैं।’’

मंच के ठीक सामने पहली कतार में बैठी सदफ (32 वर्ष) कहती हैं कि उन्होंने इससे पहले कभी किसी विरोध प्रदर्शन तो क्या किसी बैठक में भी हिस्सा नहीं लिया था। उन्होंने कहा, “यह मेरे लिए बिल्कुल नए तरह का अनुभव है।” यह कहे जाने पर कि संशोधित नागरिकता कानून से देश के मुस्लिमों पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी खुद कह चुके हैं कि एनआरसी (राष्टीय नागरिकता पंजी) को लेकर सरकार में कोई चर्चा भी नहीं हुई है, तो तबस्सुम का जवाब था ‘‘आजकल सबके पास सोशल मीडिया है और हम भी वीडियो देखते हैं। हमने कई भाजपा नेताओं को एनआरसी लागू करने की बात कहते हुए सुना है।’’ वह हंसते हुए कहती हैं, ‘‘अब मैं भी थोड़ी बहुत राजनीति समझने लगी हूं।’’

मुजफ्फरपुर से ताल्लुक रखने वाली 70 साल की सन्नो परवीन ने बताया कि वह बिहार से सिर्फ प्रदर्शन में शामिल होने आई हैं। वैसे तो उनका परिवार यही पर रहता है, लेकिन वह अपने गांव में ही रहती हैं। परवीन ने कहा कि जब तक यह कानून वापस नहीं हो जाता है, तब तक हम इसी तरह सड़कों पर रहेंगे। प्रदर्शन पर शामिल 82 साल की बिलकीस ने कहा, ‘हिंदुस्तान हमारी पहचान है और इसे हम कैसे छोड़कर जा सकते है। मेरे पास कोई सर्टिफिकेट नहीं है, ना ही मैं ज्यादा पढ़ी लिखी हूं। ऐसे में हम अपनी नागरिकता कैसे साबित करेंगे? जब देश आजाद हुआ था, तभी से इस भारत में हमारे पूर्वज रह रहे है।’

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बिलकीस ने कहा, ‘ठंड से डर से नहीं लगता, सरकार की नीतियों से डर लगता है कि कब वह हमारे ही घर से बेदखल कर दें, कुछ पता नहीं है। अपनी आने वाली पीढ़ियों के लिए हम सड़कों पर रहेंगे, जब तक कि हमारी बात नहीं मान ली जाती है।’ 80 साल की इशरत जहां ने कहा, ‘मेरे पूर्वजों ने आजादी की लड़ाई लड़ी और अब हम आजाद देश में अपनी आजादी की लड़ाई लड़ रहे हैं। क्योंकि आज हमसे नागरिकता प्रमाण मांगा जा रहा है। जबकि हमारे बच्चे हर तरह के टैक्स भी देते हैं और हर चुनाव में हम वोट देने भी जाते हैं। वोट मांगने से पहले हमसे नागरिकता का प्रमाण मांगना चाहिए था। लेकिन अब सिर्फ अपनी राजनीति के लिए आवाम का प्रयोग कर रहे हैं।’

देश के कई हिस्‍सों में चल रहे हैं शाहीन बाग जैसे प्रदर्शन

दिल्ली के शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के खिलाफ होने वाले प्रदर्शनों को महीने भर से ज्‍यादा समय हो गया है। सीएए के खिलाफ इन प्रदर्शनों में महिलाओं और बच्‍चों की भागीदारी भी काफी ज्‍यादा देखने में आई है। इस तरह के प्रदर्शन कोलकाता, हैदराबाद, मुंबई, प्रयागराज, इंदौर, गया और कानपूर जैसे देश के दूसरे हिस्‍सों में भी देखने में आ रहे हैं।

इंदौर का बड़वाली चौकी क्षेत्र बना सीएए-एनआरसी विरोधी प्रदर्शन का केंद्र

मध्‍य प्रदेश के इंदौर का बड़वाली चौकी क्षेत्र भी सीएए-एनआरसी विरोधी प्रदर्शन का केंद्र बन चुका है। मुस्लिम बहुल बड़वाली चौकी क्षेत्र में शुक्रवार को भी धरना-प्रदर्शन जारी रहा। अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में एहतियात के तौर पर पुलिस बल तैनात किया गया है। हालात पर प्रशासन की भी नजर बनी हुई है। जुमे (शुक्रवार) की नमाज के बाद बड़वाली चौकी के जामा मस्जिद मैदान पर लोग सीएए और एनआरसी के विरोध में तिरंगे झंडे और तख्तियां लेकर धरना-प्रदर्शन तथा नारेबाजी करते दिखायी दिये। उनमें बड़ी तादाद में महिलाएं भी थीं।

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कोलकाता के पार्क सर्कस में जमे प्रदर्शनकारी

कोलकाता के बेनियापुकुर इलाके में सीएए के खिलाफ प्रदर्शन पूरे जोर से जारी हैं। इसी तरह कोलकाता के पार्क सर्कस मैदान में सीएए और एनपीआर के खिलाफ दिल्ली के शाहीन बाग की तर्ज पर करीब 30 महिलाएं सात जनवरी से धरने पर बैठी हैं। इन धरने-प्रदर्शनों में मुस्लिम समुदाय के अलावा दूसरे समुदाय के लोग भी हिस्‍सा ले रहे हैं।

हैदराबाद में हो गई तिरंगों की कमी

तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में नागरिकता संशोधन कानून का इतना जबर्दस्‍त विरोध हो रहा है कि वहां तिरंगों की कमी हो गई है। विरोध प्रदर्शन में प्रदर्शनकारी बड़ी संख्‍या में तिरंगा लेकर चलते हैं। तिरंगे की सप्‍लाई करने वाले लोगों का कहना है कि पहली बार गणतंत्र दिवस पर झंडे की कमी हुई है। मांग को देखते हुए दुकानदारों ने तिरंगे की कीमत दोगुनी कर दी है।

मुंबई में लग रहे तरह-तरह के नारे

देश की वाणिज्यिक राजधानी कहे जाने वाले महानगर मुंबई में जोगेश्‍वरी, अग्रीपाड़ा जैसे अलग-अलग हिस्‍सों में संशोधित नागरिकता कानून, एनआरसी और एनपीआर का विरोध जारी है। इनमें लोग तरह-तरह के नारे लगा रहे हैं। जैसे, ‘मैं गुजरात से हूं 2002 में मेरे कागजात जल गए। सीएए नहीं चाहिए। एनआरसी का बहिष्कार। भारत को बांटना बंद करो, हमें मत बांटो। संविधान की रक्षा हो।’

प्रयागराज का मंसूर अली पार्क बना शाहीन बाग

यूपी के प्रयागराज में रोशन बाग स्थित मंसूर अली पार्क भी ‘शाहीन बाग’ बन चुका है। यहां पिछले लगभग एक सप्‍ताह से महिला प्रदर्शनकारी डटी हुई हैं। वे मोदी सरकार पर देश के संविधान पर हमले का आरोप लगाती हुई दोहरा रही हैं कि जब तक जरूरी होगा वे अपने आंदोलन से पीछे नहीं हटेंगी।

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