चेन्नई, स्पोर्ट्स डेस्क | वेब वार्ता
चेन्नई में 29 और 30 जनवरी 2026 को आयोजित एशिया–प्रशांत डाउन सिंड्रोम खेल 2026 में भारत सहित एशिया-प्रशांत क्षेत्र के कई देशों के खिलाड़ियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। इस अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिता में निफ्टेम-के (राष्ट्रीय खाद्य प्रौद्योगिकी उद्यमिता एवं प्रबंधन संस्थान, कुंडली) से जुड़े खिलाड़ियों ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण और रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन किया।
एशिया-प्रशांत देशों के खिलाड़ियों की रही भागीदारी
प्रतियोगिता में भारत के साथ श्रीलंका, जापान, मलेशिया, सिंगापुर और थाईलैंड समेत कई देशों के खिलाड़ियों ने भाग लिया। खिलाड़ियों ने बोचे, सॉफ्टबॉल थ्रो, एथलेटिक्स, तैराकी और स्केटिंग जैसी विभिन्न खेल स्पर्धाओं में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया। इस आयोजन ने समावेशी खेल भावना को मजबूत करते हुए विशेष आवश्यकता वाले खिलाड़ियों को वैश्विक मंच प्रदान किया।
कृतिका ने दो स्वर्ण पदक जीतकर बढ़ाया मान
कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच निफ्टेम-के की एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. थंगलक्ष्मी की पुत्री कृतिका ने बोचे और सॉफ्टबॉल थ्रो स्पर्धाओं में शानदार प्रदर्शन करते हुए दो स्वर्ण पदक अपने नाम किए। उनकी सटीकता, संतुलन और शक्ति आधारित खेल कौशल ने न केवल दर्शकों बल्कि निर्णायकों को भी प्रभावित किया।
आर्णा ने रजत पदक जीतकर किया प्रभावित
वहीं, निफ्टेम-के की प्रोफेसर डॉ. राखी सिंह की पुत्री आर्णा ने बोचे स्पर्धा में रजत पदक जीतकर भारत के पदक खाते में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ी। आर्णा ने विभिन्न देशों से आए अनुभवी खिलाड़ियों के साथ कड़ी प्रतिस्पर्धा में अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और खेल प्रतिभा का परिचय दिया।
समावेशी खेल संस्कृति की दिशा में महत्वपूर्ण कदम
इस बहु-देशीय प्रतियोगिता में निफ्टेम-के खिलाड़ियों की सफलता न केवल उनकी मेहनत और समर्पण का परिणाम है, बल्कि यह विशेष आवश्यकता वाले खिलाड़ियों के लिए बढ़ते अवसरों और समावेशी खेल संस्कृति को भी दर्शाती है। इन उपलब्धियों ने यह सिद्ध किया है कि उचित प्रशिक्षण, समर्थन और मंच मिलने पर हर खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्कृष्ट प्रदर्शन कर सकता है।
- निफ्टेम-के की कृतिका ने जीते दो स्वर्ण पदक
- आर्णा ने बोचे स्पर्धा में रजत पदक किया हासिल
- एशिया-प्रशांत देशों की व्यापक भागीदारी
खेल विशेषज्ञों और आयोजकों ने निफ्टेम-के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे प्रेरणादायी उपलब्धि बताया है। यह सफलता आने वाले वर्षों में विशेष आवश्यकता वाले खिलाड़ियों के लिए और अधिक अवसरों का मार्ग प्रशस्त करेगी।
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