Saturday, January 31, 2026
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शंकराचार्य प्रकरण पर अखिलेश यादव का हमला, बोले– भाजपा के दंभ ने सनातन परंपरा को ठेस पहुंचाई

लखनऊ, अजय कुमार | वेब वार्ता

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद से जुड़े घटनाक्रम को लेकर भारतीय जनता पार्टी पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा के दंभ और अहंकार ने अनादिकाल से चली आ रही सनातन परंपरा को गहरी ठेस पहुंचाई है। तीर्थराज प्रयाग की पावन धरती पर माघ मेले के दौरान जगद्गुरु शंकराचार्य का बिना पवित्र स्नान किए लौट जाना सनातन समाज के लिए पीड़ादायक और चिंताजनक घटना है।

सनातन समाज आहत और आशंकित

अखिलेश यादव ने कहा कि इस घटना से न केवल देश, बल्कि संपूर्ण विश्व का सनातन समाज आहत हुआ है। उन्होंने इसे सनातनी परंपराओं के प्रति असंवेदनशीलता का प्रतीक बताया और कहा कि इस प्रकार की घटनाएं धार्मिक समाज में अनिश्चित भय और असंतोष को जन्म देती हैं।

भाजपा पर अहंकार का आरोप

सपा अध्यक्ष ने कहा कि यदि भाजपा और उसके सहयोगी चाहते, तो सत्ता की हनक और अहंकार को त्यागकर शंकराचार्य के सम्मान की रक्षा कर सकते थे। उन्होंने कहा कि शंकराचार्य को त्रिवेणी संगम पर पवित्र स्नान कराकर उनकी परंपरा और सम्मान को बनाए रखा जा सकता था, लेकिन सत्ता से उपजा घमंड आड़े आ गया।

अखिलेश यादव ने यह भी आरोप लगाया कि भ्रष्ट साधनों से अर्जित शक्ति का अहंकार ही भाजपा को संत समाज के प्रति विनम्र व्यवहार करने से रोक रहा है।

संतों का अपमान, सामाजिक पीड़ा

उन्होंने कहा कि संतों का मन दुखी करके कोई भी सत्ता या व्यक्ति सुख और स्थायित्व प्राप्त नहीं कर सकता। भूल से बड़ी गलती क्षमा न मांगना है। किसी भी राजनीतिक पद या सत्ता की हैसियत संत समाज के सम्मान से बड़ी नहीं हो सकती।

  • शंकराचार्य का बिना स्नान लौटना सनातन परंपरा पर आघात
  • भाजपा पर अहंकार और असंवेदनशीलता का आरोप
  • संत समाज के सम्मान को सर्वोपरि बताया

महाकाव्यों का संदेश याद दिलाया

अखिलेश यादव ने कहा कि भारतीय महाकाव्यों का मूल संदेश स्पष्ट है कि घमंड का अंत निश्चित होता है और अहंकार का दंड कोई भी दुर्जन नहीं टाल सकता। उन्होंने कहा कि धार्मिक अनुष्ठानों में व्यवधान उत्पन्न करना निंदनीय है और इससे सत्ता के अंत की भूमिका तैयार होती है।

निष्कर्ष

शंकराचार्य प्रकरण को लेकर समाजवादी पार्टी का यह बयान धर्म, सत्ता और परंपरा के संबंधों पर एक नई राजनीतिक बहस को जन्म देता है। सपा का कहना है कि सनातन परंपराओं का सम्मान और संत समाज की गरिमा बनाए रखना किसी भी सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी होनी चाहिए।

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