कुशीनगर में शिक्षा विभाग और CANVA Education के बीच MoU, छात्रों को मिलेगा एआई और डिजिटल डिजाइन का प्रशिक्षण

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कुशीनगर, ममता तिवारी (वेब वार्ता)। डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देने और छात्रों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से कुशीनगर के शिक्षा विभाग और कैनवा एजुकेशन के बीच जल्द ही एक महत्वपूर्ण एमओयू (MoU) किया जाएगा। इस पहल की शुरुआत हाल ही में जिले में हुए कार्यक्रम के दौरान हुई, जहां कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री जयंत चौधरी और राज्यसभा सांसद आरपीएन सिंह की विशेष भूमिका रही।

क्या है इस एमओयू का उद्देश्य?

मुख्य विकास अधिकारी गुंजन द्विवेदी ने जानकारी दी कि इस समझौते के तहत कक्षा 6 से 12 तक के छात्रों और शिक्षकों को कैनवा प्लेटफ़ॉर्म का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस प्रशिक्षण में खास ध्यान आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर होगा।

कैनवा एक लोकप्रिय ऑनलाइन डिज़ाइन प्लेटफ़ॉर्म है जो पोस्टर, प्रेज़ेंटेशन, सोशल मीडिया ग्राफ़िक्स, वीडियो, इन्फ़ोग्राफ़िक्स जैसी सामग्री बनाने में मदद करता है। यह प्लेटफॉर्म ड्रैग-एंड-ड्रॉप तकनीक पर आधारित है और कंप्यूटर, टैबलेट या मोबाइल पर आसानी से उपयोग किया जा सकता है।

कैनवा प्लेटफ़ॉर्म से छात्रों को क्या लाभ होगा?

  • प्रेज़ेंटेशन, असाइनमेंट और प्रोजेक्ट रिपोर्ट बनाने में सहायता।

  • पोस्टर, बैनर, निमंत्रण पत्र और सोशल मीडिया सामग्री तैयार करने का अवसर।

  • वीडियो एडिटिंग और एनीमेशन जैसी आधुनिक डिजिटल स्किल्स।

  • टीम वर्क के तहत रियल-टाइम डिज़ाइन पर काम करने की सुविधा।

सीडीओ गुंजन द्विवेदी ने बताया कि एआई का महत्व लगातार बढ़ रहा है, यह न केवल समय बचाता है बल्कि रचनात्मकता और उत्पादकता को कई गुना बढ़ाता है। इस पहल से छात्रों को भविष्य के रोजगार अवसरों और डिजिटल उद्यमिता में बढ़त मिलेगी। वहीं, शिक्षक तकनीक-समर्थ शिक्षण सामग्री तैयार कर कक्षाओं को और प्रभावी बना सकेंगे।

डिजिटल शिक्षा में अग्रणी बनने की दिशा में कुशीनगर

इस एमओयू को जिला प्रशासन ने डिजिटल एजुकेशन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम बताया। यह समझौता कुशीनगर को तकनीकी शिक्षा के मामले में राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल करने में सहायक होगा।

हाल ही में हुए अन्य एमओयू

जून महीने में जिला प्रशासन ने एएसआई और इन-स्पेस के साथ एक और एमओयू किया था, जिसके तहत अक्टूबर 2025 में आयोजित होने वाले इन-स्पेस मॉडल रॉकेट्री इंडिया स्टूडेंट कॉम्पिटिशन की तैयारी के लिए थ्रस्ट इंडिया द्वारा विकसित मॉडल रॉकेट का सफल परीक्षण किया गया। यह पहल युवाओं में विज्ञान, प्रौद्योगिकी और नवाचार को बढ़ावा देने के लिए की गई थी।

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