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New Delhi, IN
Monday, July 16, 2018

व्यंग्य

घूमने के शौकीन एक राजा की कहानी

-प्रदीप पंत- तब प्रांत नहीं सूबे हुआ करते थे। किसी सूबे के एक दबंग मालिक थे। सारे सूबे में वर्षों से उनका शासन था, जिसके...

दूसरों की कमाई, हमें क्यों बताते हो भाई ….!!

तारकेश कुमार ओझा उस विवादास्पद अभिनेता पर बनी फिल्म की चर्चा चैनलों पर शुरू होते ही मुझे अंदाजा हो गया कि अगले दो एक-महीने हमें...

इंशा अल्लाह अब मेरे नाम के आगे भी लिखा जाएगा बाबाजी का ठुल्लू एवार्ड...

-डॉ. भूपेन्द्र सिंह गर्गवंशी- आज सुलेमान काफी संजीदा लग रहा था। मेरे लेखन कक्ष में सामने बैठा पता नहीं कुछ सोच रहा था, मैंने उसे...

भगवान सरकारी बंगला किसी से न खाली करवाए….!!

-तारकेश कुमार ओझा- मैं जिस शहर में रहता हूं इसकी एक बड़ी खासियत यह है कि यहां बंगलों का ही अलग मोहल्ला है। शहर के...

बेर-केर कुसंग

-डॉ. सुरेन्द्र वर्मा- कहु कबीर कैसे निभे बेर केर को संग वे डोलत रस आपने, उनके फाटे अंग। अभी तक मुझे अच्छी तरह याद है कि वर्षों...

जैसे-कैसे हो गया बस!

-अशोक गौतम- बरसों से महसूस होने का सारा सिस्टम खटारा होने के बाद भी कई दिनों से मैं महसूस कर रहा था कि जब-जब पत्नी...

चरित्रहीन

कितने ही लोग हैं जो चरित्रहीन होकर भी चरित्रवान का तमगा लगाकर, सर उठाकर जी रहे हैं। जब भी वे पुलिस फाइल्स या क्राइम...

चांद की सैर

-जौली अंकल- एक शाम वीरू काम से लौट कर अपने घर में टीवी पर समाचार देख रहा था। हर चैनल पर मारपीट, हत्या, लूटपाट और...

हुक्का हुजूर (व्यंग्य)

-डा. सुरेन्द्र वर्मा- एक समय था जब मैंने भी अपने बाबा हुजूर का हुक्का भरा था। वह भी क्या समय था। बाबा चारपाई पर विराजे...

बिकने बिकाने के दौर में

-अशोक गौतम- कई दिनों से बराबर महसूस कर रहा था कि पोता अपनी दादी के साथ खींची मेरी पुरानी फोटो से परेशान है। इस बारे...