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Sunday, January 21, 2018

व्यंग्य

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  -केशवचंद्र वर्मा- इस देश के तमाम लोगों की तरह मुझे भी यकीन हो रहा है कि इस देश के भविष्या का निर्माण करने का काम...

दोस्ती (हास्य-व्यंग्य)

-हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन- दोस्ती एक गांव में आग लगी थी। अफरा तफरी मची हुई थी। जो भाग सकते थे वे भाग रहे थे। जो अशक्त...

छपना है तुझे रचना के लिए

-अमित शर्मा (सीए)- किसी लेखक के लिए छपना उतना ही ज़रूरी और स्वाभाविक है जितना कि किसी राजनैतिक पार्टी का टिकट वितरण में धांधली करना।...

सफाई का भूत

-सुशील यादव- गनपत सुबह सुबह कार्ड ले के आया। कार्ड देखते ही हमको लगता है, सौ से पांच सौ की बलि चढ़ने का परवाना आ गया। हमने...

व्यंग : लोकतंत्र में गधे और हम

-प्रभुनाथ शुक्ल- सुबह सो कर उठा तो मेरी नज़र अचानक टी टेबल पर पड़े अख़बार के ताजे अंक पर जा टिकी। जिस पर मोटे-मोटे अक्षरों...

रोजर ऊर्फ कोठी वाला कुत्ता

-अशोक गौतम- अपने मुहल्ले में कोठी वालों को छोड़ सारे मुहल्ले वाले शाम होते ही एक दूसरे के घर शान से पूरे रौब के साथ...

नास्त्रेदमस और मैं…. (व्यंग्य)

नास्त्रेदमस और मैं.... (व्यंग्य) 8/26/2017 5:14:21 PM -सुशील यादव- जनाब नास्र्त्रेदमस ने सन बावन, यानी उन्नीस सौ बावन के बैसाख दसवी तिथि को मध्यभारत इलाके में...

व्यंग्य: सुबह की सैर और कुत्ते

व्यंग्य: सुबह की सैर और कुत्ते 8/27/2017 4:56:00 PM -अरविंद कुमार खेड़े- मैं ठीक हूँ। मुझे अभी कोई दिक्कत नहीं है। उपरवाले की दया है। अभी...

वॉट्सएप की दुनिया (व्यंग्य)

वॉट्सएप की दुनिया (व्यंग्य) 8/30/2017 4:31:18 PM -राजशेखर चौबे- जिस तरह खराब मुद्रा अच्छी मुद्रा को बाहर का रास्ता दिखा देती है उसी तरह नया आविष्कार...

चुनावी फसल से खलिहान भरने की चाहत..

चुनावी फसल से खलिहान भरने की चाहत... 9/16/2017 1:20:20 PM -तारकेश कुमार ओझा- गांवदृदेहात से थोड़ा भी संबंध रखने वाले भलीभांति जानते हैं कि खेतीबारी कितना...
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