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Sunday, January 21, 2018

कविता

कम-से-कम रात भर ठहर जाईं

-पांडेय आशुतोष- कम-से-कम रात भर ठहर जाईं आंख के कोर तक पसर जाईं ताल-पोखर के बात ना भूली जेमें हमनी के डूब उतराईं हमनी खेलीं जा खेत खरिहाने ढोल गटई...

सरस्वती-वंदना

-बी.के.गुप्ता ‘हिन्द’- हे मां सरस्वती तू, ज्ञान की दाता है। जय मां सरस्वती तू, ज्ञान की दाता है।। अज्ञान के सागर में, तू भाग्य विधाता है। हे मां...

क्यों याद आ रहे हैं गुजरे जमाने

-मुकेश कुमार- इक जिद थी बड़े होने की लाखों कोशिशों के बाद जब बड़े होने लगे अहसास हुआ की कुछ पीछे छूट रहा है। बीते लम्हे याद...

मुस्कुराता हुआ हर चेहरा अच्छा लगता है

मुस्कुराता हुआ हर चेहरा अच्छा लगता है, चेहरे का नूर ही कुछ अलग सा लगता है, लोग कहते है कि मुस्कान हर दर्द को छिपा लेती...

अभिमान

-दिव्या यादव- फौलाद बन गई हैं अभिमान की शिलायें पाले हैं बैर उसने कैसे उसे मनायें मगरुर है वो इतना, टूटेगा चाहे जितना आहें नहीं भरेगा, सहे चाहे...

विदा वर्ष 2017

-सुशील शर्मा- साल 2017 तुम उतर गए खूंटी से पर मुझे दे गए बहुत कुछ। बहुत प्यारी यादें। बहुत प्यारे अपने छोटों का स्नेह बड़ों का आशीर्वाद। शिक्षा में अध्यापन साहित्य में सृजन। समाज...

मन की व्यथा

-दिव्या यादव- रीत गया है मन का घट अब शेष नहीं कुछ और विकार खाली घट में झाँका मैंने तो देखी एक दरार एक समय था जब मन का हर कोना महका...

कविता: भार्या

कविता: भार्या 8/30/2017 4:30:35 PM -सत्य प्रसन्न राव- कभी कठिन पाषाण लगे तो, कभी मृदुल नवगीत लगे। कभी क्लिष्ट भावों की कविता, कभी सरल नवगीत लगे।...

आ गया फिर चुनाव

आ गया फिर चुनाव 9/16/2017 1:18:26 PM -मिलन सिन्हा- लो, आ गया फिर चुनाव! न जाने इस बार किस-किस की डूबेगी नाव इसी सोच में पड़े...

हे मेरे आकाश सरीखे आत्मन देखो तो

हे मेरे आकाश सरीखे आत्मन देखो तो 9/24/2017 3:08:35 PM -वसुन्धरा पाण्डेय- हे मेरे आकाश सरीखे आत्मन देखो तो तुम्हे देखते रहने की ख़ुशी और आनंद...
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