पुण्यतिथि पर याद किए गए मुगल शहंशाह बहादुर शाह जफर

नई दिल्ली, 07 नवंबर (अनवार अहमद नूर)। हिंदुस्तान की स्वतंत्रता संग्राम के महानायक मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की 157वीं पुण्यतिथि के अवसर पर उन्हें याद करते हुए जंगे आजादी का महान योद्धा करार दिया गया और भारत के इतिहास में न उनको कभी भुलाया जा सकता है और न कभी हटाया या मिटाया जा सकता है और जो लोग इस तरह का प्रयास कर रहे हैं वह वास्तव में देश के इतिहास के हितेषी नहीं बल्कि विरोधी हैं। दरसगाह मुगल शहंशाह बहादुर शाह जफर के नेतृत्व में गालिब एकेडमी निजामुद्दीन नई दिल्ली में हुए एक दिवसीय आयोजन में अनेक स्वतंत्रता से जुड़े सेनानियों के वंशजों ने भाग लिया और बहादुर शाह जफर को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए देश की वर्तमान स्थिति पर चिंता और चर्चा व्यक्त की।

सम्राट बहादुर शाह जफर के वंशज नवाब शाह मोहम्मद शोएब खान ने कहा कि आज विश्व स्तर पर कई तरह की समस्याएं और साजिशें हमारे सामने खड़ी हैं जिनका मुकाबला हम सभी लोग आपस में एकजुट होकर भाई चारे के साथ कर सकते हैं और राजनीतिक व्यवस्था, सांप्रदायिकता, क्षेत्रवाद और हिंसा जैसी समस्याओं से हम संघर्ष कर सकते हैं। इस अवसर पर अच्छे काम करने वालों तथा समाज में एक दूसरे के प्रति तथा अपने बड़ों का सम्मान करने वालों को भी सम्मानित किया गया। और मुगल बादशाह बहादुर शाह जफर की कुर्बानियों को, उनकी शायरी और देश प्रेम को उजागर किया गया। साथ ही बताया गया कि किस तरह देश के हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई और राजघरानों ने उनके नाम को अपने आंदोलन का झंडा बनाया और अंग्रेजो के खिलाफ संघर्ष क्या किया। जिससे आगे चलकर हमारे देश को आजादी मिली और अंग्रेज देश छोड़ने को मजबूर हो गए।

यही मौका था जब लोगों में जोश भरते हुए कहा गया कि बहादुर शाह जफर जैसे देश के महान योद्धा के नेतृत्व में वह जादू का असर था जिसे सारे देश के लोगों ने अपनाया और उनके पीछे एक पूरा आंदोलन शुरू किया जबकि खुद बहादुर शाह जफर ने अपने बूढ़े होने को उनके सामने रखा था मगर देश के लोग उनको इतना सम्मान देते थे कि उन्होंने उनसे सिर्फ हां करने को कहा और फिर देश में एक बड़ा आंदोलन छेड़ा। इसके बाद किस तरह से बहादुर शाह जफर के परिवार की कुर्बानी ली गई और अंग्रेजों ने उनके साथ बड़ा जुल्म अत्याचार किया मगर उस योद्धा के माथे पर एक चिकन तक नहीं आई। बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार करने के बाद जब मेजर हटसन ने उनका मजाक उड़ाते हुए कहा कि दमदमे में दम नहीं खैर मांगो जान की, ऐ जफर ठंडी हुई अब तेग हिंदुस्तान की। तो उस पर बहादुर शाह जफर ने जो जवाब दिया वह आज इतिहास में, देशवासियों के दिलों में और नौजवानों के दिलों में पूरी तरह से दर्ज है और उनका हौसला बढ़ाता है उन्होंने कहा गाजियों में बू रहेगी जब तलक ईमान की, तख्ते लंदन तक चलेगी तेग हिंदुस्तान की।

प्रोग्राम में भाग लेने वालों में सरदार डॉक्टर भट्टी, राजा आदित्य भान सिंह, आचार्य रमेश पांडे, बेंगलुरु से काजी अनीस उर हक (दूरदर्शन) बट सूरी मंगलोरियन काउंसलर, रमन सेठी इंडिया मंगोलिया संगठन के महासचिव, मौलाना मुजम्मिल हक, डॉक्टर सिददीकी, राममोहन राय पानीपत, डॉ. रीमा ईरानी, समीना खान, सिराज कुरैशी, इफ्तिखार ख्वाजा, मुफ्ती अताउर रहमान, डीपी राघव गुड़गांव, डॉक्टर संध्या अग्रवाल, टीपू पीटर पादरी गाजियाबाद, ओमकार मित्तल, राखी गुप्ता, राजा वर्मा, वेबवार्ता के संपादक सईद अहमद, राब्ता टाइम्स के इकबाल खान, सायबान की जावेद रहमानी, शांति मिशन के अनवार अहमद नूर, ट्रांसपेरेंट न्यूज़ के अजहर इमाम, अमन न्यूज़ के असलम बर्नी, लाइव-24 के इरफान शेख एवं रोहित कुमार, डेब्रेक के इमरान कलीम सहित अनेक गणमान्य व्यक्तियों, पत्रकारों और समाजसेवियों ने भाग लिया।

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