अद्वैत दर्शन ही मानवता का एकमात्र विकल्प है: प्रो. तिवारी

नई दिल्ली, (वेबवार्ता) । अद्वैत दर्शन ही मानवता का एकमात्र विकल्प है, अद्वैत वेदांत दर्शन एवं आचार्य शंकर के मानवतावादी दर्शन विषयक तीन दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय संगोष्ठी डॉ हरिसिंह गौर केंद्रीय विश्वविद्यालय सागर मध्य प्रदेश में आयोजित की जा रही है। विश्व की एकता एवं मानवी उन्नत के लिए सागर में हो रहे। इस वैचारिक समागम में देश विदेश के कई प्रमुख वेदांती एवं विचारक आचार्य शंकर के अद्वैत दर्शन का मंथन कर अमृत बिंदु का निष्कर्ष करेंगे।

सागर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर आरपी तिवारी ने भारतीय विश्वविद्यालय संघ नई दिल्ली में आयोजित  पत्रकार वार्ता में बताया कि आचार्य शंकर के अद्वैत दर्शन का विचार संपूर्ण विश्व को भारत की अनुपम देन है। जो समूची सृष्टि को समरूप करते हुए मानवी एकरूपता की बात करता है। जब संपूर्ण मानवता अतिरेको के दौर से गुजर रही है। जिसमें जाति पंथ संप्रदाय के वर्कर्स व्यक्तिगत एवं सामूहिक अस्तित्व मूलक संकट गहरा रहा है न केवल विकासी उपक्रम के दोहन वाद वादी रवैया से मानवता जूझ रही है बल्कि मानवता के समक्ष पर्यावरणीय उपभोक्तावादी संकट भी एक चुनौती बन गया है। ऐसे में अद्वैत दर्शन का विकल्प ही मानवता को एक नई दिशा दे सकता है इसके लिए सागर विश्वविद्यालय कृतसंकल्प है।

मानवता को बचाने के लिए केवल सामाजिक सांस्कृतिक एवं राजनीतिक पहलू ही पर्याप्त नहीं है। यह तीन दिवसीय संगोष्ठी आध्यात्मिक चिंतन से अनुप्राणित है।

प्रोफेसर तिवारी ने बताया कि यह संगोष्ठी अपने आप में समरूप एक आकार के दर्शन से अनुप्राणित है इस संगोष्ठी में देश विदेश के कई रूपांकर कलाकार सम्मिलित होंगे जो अपनी हस्त कलाओं के माध्यम से अद्वैत दर्शन के अमूर्त चिंतन को जनसामान्य तक मूर्त रूप देंगे। ऐसे सर्वश्रेष्ठ कलाकारों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किया जाएगा। प्रोफेसर तिवारी ने बताया कि इस महाकुंभ में राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय आध्यात्मिक आकादमिक शोध संस्थान विभिन्न स्वरूपों में सहयोग कर रही हैं।

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