C
New Delhi, IN
Monday, August 20, 2018
[vc_text_separator title=”साहित्य” style=”dashed” border_width=”5″]

पुस्तक समीक्षा: बदलते हुए मीडिया की बेबाक मीमांसा

पुस्तक: मीडिया हूं मैं। लेखक: जयप्रकाश त्रिपाठी। प्रकाशक: अमन प्रकाशन, कानपुर, उत्तर प्रदेश। मूल्य: 550 रुपये (पेपर बैक)। इन दिनों, जब मीडिया इंडस्ट्री को सबसे तेज भागती और...

गुमनाम नायकों को श्रद्धांजलि है विष्णु शर्मा की ये किताब (पुस्तक समीक्षा)

शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकीं निशां होगा... देश के लिए सबकुछ कुर्बान कर देने...

लघु कथा : किनारा

-अशोक महिश्वरे- श्रावण अपनी दादी के साथ रहता है। माता-पिता भी हैं। गरीबी इन्हें पुत्र वियोग पर विवश कर देती है। संयोग सदैव उदर पोषक...

शरीफ जादियां (पंजाबी कहानी)

-सुरिंदर सिंह नरूला- संतराम अपनी पत्नी और विधवा बहन के साथ जब दिल्ली में शरणार्थी बनकर आया तो वह बहुत परेशान था। परेशानी उसे इस...

कहानी: प्रश्न अभी शेष है

-राकेश भ्रमर- रात गहरी हो चुकी थी, परन्तु धनेसरी को नींद नहीं आ रही थी। बुढ़ापा और नींद का वैसे भी आपस में बैर होता...

एक पांव का जूता (कहानी)

-भैरव प्रसाद गुप्त- जाने कैसी आवाज उनके कानों में पड़ी कि वह चिहुक उठीं। तीन दिन से रात में कई-कई बार ऐसा हो रहा था।...

प्रैक्टिकल (कहानी)

-चैतन्य प्रकाश- यह सब झूठ है, बेबुनियाद है, मेरे राजनैतिक विरोधियों की चालबाजी है। फोन पर उत्तर देते हुए श्याम सुंदर ने कहा। उसके चेहरे...

घंटियां (कहानी)

-विनीता शुक्ला- आज रंजिनी की पहली पुण्यतिथि थी। मयंक ने भारी ह्रदय से उसकी तस्वीर पर पुष्पमाला अर्पित की। तस्वीर को निहारते हुए, एक मार्मिक...

मंगली की टिकुली (कहानी)

-भैरव प्रसाद गुप्त- शाम झुक आयी, तो मंगली ने ताखे से ठिकरा उठाया और दीवार पर खिंची चिचिरियों के आगे एक और चिचिरी खींच दी।...

रॉड (कहानी)

-सत्य प्रकाश- खुशबू रोज सुबह सात बजे काम पर पहुँच जाती। जब वह काम पर पहुंचती तो सब सो रहे होते। जाड़ों के दिन थे।...