इस्लामोफोबिया विभाजन पैदा कर रहा है : इमरान खान

इस्लामाबाद, 28 सितंबर (वेबवार्ता)। यूएन में पीएम नरेंद्र मोदी ने अपने भाषण में दुनिया में शांति की बात की और युद्ध का संदेश दिया, लेकिन उनके बाद बोलने आए पाक पीएम इमरान ने पर बौखलाहट दिखाते हुए भड़काऊ नेता की तरह से भाषण दिया। उन्होंने तो यहां तक कह दिया कि अगर वह कश्मीर में होते तो बंदूक उठा लेते। यही नहीं इस्लाम को लेकर बोलते हुए इमरान खान ने पश्चिमी देशों को आतंकवाद के लिए जिम्मेदार ठहराया। हालांकि यह भी स्वीकार किया कि आतंकवादी संगठनों को पाकिस्तान में ही ट्रेनिंग दी गई और पश्चिमी देशों ने इसकी फंडिंग की। यूएन ने सभी को 15 मिनट का समय दिया था, पीएम मोदी ने भी इतने ही समय में भाषण दिया, लेकिन इमरान को समय का अंदाजा ही नहीं रहा।

इमरान खान ने कहा, ‘दुनिया के कुछ नेता जो कुछ कर सकते हैं वे स्थिति की गंभीरता को समझ नहीं रहे हैं। पाकिस्तान टॉप 10 ऐसे देशों में हैं जो जलवायु परिवर्तन से सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। हम कृषि प्रधान देश हैं औरर 80 प्रतिशत पानी ग्लेशियर से आता है और वे केवल पाकिस्तान नहीं बल्कि भारत में भी हैं। भारत की नदियां भी पाकिस्तान में आती हैं। ये ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं। अगर ऐसा होता रहा तो यह दुनिया के लिए ठीक नहीं है। मानव में बड़ी ताकत है और कुछ भी कर सकता है। मुझे लगता है कि यूएन को जलवायु परिवर्तन के बारे में जरूर सोचना चाहिए।’

 इमरान खान ने कहा, दुनिया में अरबों मुस्लिम हैं और हर कोने मे रहते हैं। वे कई देशों में अल्पसंख्यक है। 9/11 के बाद इस्लामोफोबिया बढ़ा है। इससे अलगाव हुआ है। हिजाब पहनना भी एक मुद्दा बन गया है जैसे कि यह हथियार है। यह कैसे हो रहा है? यह कैसे शुरू हुआ? 9/11 के बाद, क्योंकि कुछ लोगों ने आतंकवाद को इस्लाम से जन्मा बताया। उन्होंने कट्टर इस्लाम का जिक्र किया। ऐसा कुछ नहीं है, केवल एक इस्लाम है। न्यू यॉर्क में कैसे पता लगेगा कि कौन सा मुसलमान अच्छा है और कौन बुरा है। आतंकवाद का कोई धर्म नहीं है। ऐसे शब्दों का प्रयोग करना बहुत दुख देने वाले हैं और मुस्लिम आहत हैं। यूरोप के देशों में मुस्लिम समुदाय हासिए पर है और यही रैडिकलाइजेशन की वजह है। सीरिया में ऐसा ही हुआ।

 इमरान खान ने कहा, ‘मुझे दुख है कि हम मुस्लिम नेता इस मामले को नहीं रखते हैं। 9/11 के बाद मुस्लिम नेताओं ने क्यों नहीं समझाया कि कट्टर इस्लाम कुछ नहीं है। कोई भी धर्म कट्टरता नहीं सिखाता है। दुर्भाग्य है कि मुस्लिम नेतृत्व बहुत डरा हुआ था। पाकिस्तान में भी लोगों ने सोचा कि जो वेस्टर्न कपड़े पहनेगा, अंग्रेजी बोलेगा वे कट्टर नहीं है। 9/11 के बाद इस्लाम की तुलना आतंकवाद से होने लगी। इसके बाद कई थ्योरीज आई जिसमें कहा गया कि मुस्लिम ऐसे हमले इसलिए करते हैं क्योंकि वे हूरों को पाना चाहते हैं। इमरान ने आरोप लगाया कि सबसे ज्यादा तमिल टाइगर्स ने सूइसाइड अटैक किए और वे हिंदू थे। बौखलाए इमरान ने कहा कि कोई हिंदुओं को क्यों नहीं जिम्मेदार ठहराता है?

इस्लामोफोबिया की एक वजह एक किताब भी रही है। इस्लाम को असहिष्णु बताया गया। मैं पश्चिम के कुछ लोगों को जिम्मेदार ठहराता हूं। हमें बताना होगा कि इस्लाम का हमारे लिए क्या मतलब है। पैगंबर ने पवित्र कुरान को लोगों को दिया। वही हमारी आदर्श है। पैगंबर ने मदीना बनाया। यही मुस्लिम सभ्यता का आधार है। सुनता हूं कि इस्लाम महिलाओं के खिलाफ है। मदीना में पहला ऐसा राज्य बना जो सभी के हित का काम करता था। यहां बताया गया कि सभी मानव बराबर हैं। यहां बताया गया कि गुलामों को आजाद करना पुण्य है। मुस्लिम शासन में गुलाम भी शासक बने। इस्लाम में पैगंबर ने कहा कि सभी अपने हिसाब से पूजा कर सकते हैं।’ खान ने कहा, दिल का दर्द किसी भी दर्द से बढ़कर होता है। जब मैं पहली बार इंग्लैंड गया तो वहां जीसस क्राइस्ट पर कॉमिडी फिल्म देखी। तब मैंने अहसास किया कि इन लोगों में संवेदना नहीं है।

 इमरान ने कहा, ‘चौथा पॉइंट बहुत गंभीर है। यह कश्मीर के बारे में है। इससे पहले मैं बताना चाहता हूं कि जब मैं सत्ता में आया तो प्राथमिकता थी कि पाकिस्तान ऐसा देश होगा जो शांति का प्रयास करेगा। आतंकवाद के खिलाफ हमने लड़ाई लड़ी। मैं युद्ध के खिलाफ हूं। अफगानिस्तान में सोवियत के खिलाफ हमने लड़ाई लड़ी और पश्चिम से फंड मिला और अमेरिका ने फंड दिया। सोवियत ने उन्हें टेररिस्ट कहा और हमने फ्रीडम फाइटर कहा।’

उन्होंने कहा, 9/11 के बाद पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ खड़ा हुआ। जेहाद का मतलब फ्रीडम स्ट्रगल था। इसके बाद हम यूएस के साथ आए और यूएस अफगानिस्तान में आ गया तो हम आतंकवादी हो गए। 70 हजार लोगों की युद्ध में हत्या हो गई। तालिबान और अलकायदा अफगानिस्तान में था। हमें क्या करें? 70,000 पाकिस्तानी मर गए। भारत हम पर लगातार आरोप लगता है कि पाकिस्तान में आतंकी समूह हैं। हमने फैसला किया कि पाकिस्तान में कोई आतंकवादी गुट नहीं रहेगा।

इमरान खान ने पुलवामा हमले से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि एक कश्मीरी लड़के ने सेना पर हमला किया। खान ने कहा, ‘भारत ने हमपर आरोप लगाए। भारत अगर एक भी सबूत देदे तो हम कार्वाई करने को तैयार हैं। इसके बाद उन्होंने हमला कर दिया। उनका एक पायलट भी पाकिस्तान में गिरा और हमने उसे भी तुरंत लौटा दिया। चुनाव में मोदी का पूरा कैंपेन था कि उन्होंने कैसे पाकिस्तान को सबक सिखा दिया। चुनाव कैंपेन में मोदी ने यह भी कहा कि ट्रेलर है, अभी मूवी शुरू होनी बाकी है। हमने सोचा कि इलेक्शन के बाद रिश्ते सुधर जाएंगे। इसके बाद हमने दोबारा बात का प्रयास किया। इसके बाद हमें अहसास हुआ कि उनका अजेंडा कुछ और था।’

इमरान खान कश्मीर के मामले में इस हद तक गिर गए कि खून की होली की भी धमकी दे दी। उन्होंने कहा कि जब कश्मीर से कर्फ्यू हटेगा तो खून की होली होगी। इमरान ने कहा, ‘मोदी को क्या लगता है कि कश्मीर के लोग इसको शांति से स्वीकार कर लेंगे। कश्मीर में लोगों को कत्ल हुआ है। दुनिया ने कुछ नहीं किया क्योंकि भारत एक बड़ा बाजार है। मैं फिर कहना चाहता हूं, देखें, क्या होने जा रहाहै। कर्फ्यू हटते ही खून की होली होगी। मोदी कहते हैं कि उन्होंने यह विकास के लिए किया है। जब लोग बाहर निकलेंगे तो सुरक्षाबल क्या करेंगे? किसी ने क्या कभी सोचा है कि जब खून की होली होगी तो क्या होगा? कश्मीर के लोगों का क्या होगा? उन्हें घरों में कैद करके जानवरों जैसा व्यवहार होता है। कश्मीरी और ज्यादा कट्टर हो जाएंगे। फिर एक और पुलवामा होगा और भारत हम पर आरोप लगाएगा।’

इमरान ने कहा, ‘इस्लामिक टेररिजम का मंत्र फिर दोहराया जाएगा। सभी इसी पर सभी बात करेंगे कोई मानवाधिकार की बात नहीं करेगा। जैसे ही कर्फ्यू हटेगा जो भी होगा उसका आरोप पाकिस्तान पर आएगा। इसके बाद पुलवामा जैसी घटना होगी और हम पर फिर हमला होगा। क्या उन्हें कश्मीरी नहीं नजर आते हैं। मैं 18 करोड़ लोगों की बात कर रहा हूं। हम पर हमेशा आरोप लगाए जाएंगे। 1.3 अरब मुस्लिम जो यह सब देख रहे हैं। यह कश्मीरी हिंदुओं के साथ नहीं हो रहा है केवल मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है। लोग 1.3 मुस्लिमों मे से कुछ हथियार उठा लेंगे।

इमरान खान ने कहा, ‘हमने वेस्टर्न फिल्म देखी हैं। कि किसी को न्याय नहीं मिलता तो तो वह बंदूक उठा लेता है। सिनेमा में तो खूब तालियां बजती हैं। मुस्लिम इस्लाम की वजह से नहीं बल्कि अन्याय की वजह से कट्टर हो जाएंगे। तब दुनिया क्या कहेगी? मैं सोचता हूं कि मैं कश्मीर में होता और 55 दिनों से बंद होता, तो मैं भी बंदूक उठा लेता। अगर आप ऐसा कर रहे हैं तो आप लोगों को कट्टर बना रहे हैं। मैं फिर कहना चाहता हूं कि यह क्रिटिकल टाइम है। इससे पहले कि हम परमाणु युद्ध की तरफ जाएं, यूएन की जिम्मेदारी है कि कुछ करे। अब क्या 1.2 अरब लोगों के बाजार का तुष्टीकरण होगा या मानवता के साथ न्याय होगा। हम हर स्थिति के लिए तैयार हैं। अगर दो देशों के बीच युद्ध हुआ तो कुछ भी हो सकता है। हमारे सामने दो विकल्प हैं क्योंकि हम पड़ोसी से सात गुना छोटे है। या तो हम सरेंडर कर दें या फिर आखिरी सांस तक लड़ें। अगर कोई परमाणु शक्ति यह सोच लेगी तो स्थिति बहुत भयानक होगी।’

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