मंदी से बचाने के लिए सरकार ने Corporate Tax में भारी छूट का किया ऐलान

पणजी, 20 सितंबर (वेबवार्ता)। वित्‍त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने गोवा में जीएसटी काउंसिल (GST Council) की बैठक से ठीक पहले Corporate Tax में कटौती की घोषणा की। इस घोषणा के तुरंत बाद शेयर बाजार में भारी उछाल देखा गया। GST काउंसिल की बैठक (GST Council Meeting) से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने गोवा की राजधानी पणजी में प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इस प्रेस कांफ्रेंस में उन्‍होंने मंदी से निपटने के कंपनियों पर लगने वाले कॉरपोरेट टैक्स (Corporate Tax) को घटाने का ऐलान किया।

 वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण (Nirmala Sitharaman) ने कहा कि एक अध्यादेश लाकर घरेलू कंपनियों, नई स्थानीय विनिर्माण कंपनियों के लिये कॉरपोरेट टैक्‍स कम करने का प्रस्ताव दिया है। अब घरेलू कंपनियों के लिये सभी अधिशेषों और उपकर समेत कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर 25.17 प्रतिशत होगी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि नयी दर इस वित्त वर्ष के एक अप्रैल से प्रभावी होगी। उन्होंने कहा कि दर कम करने तथा अन्य घोषणाओं से राजस्व में सालाना 1.45 लाख करोड़ रुपये की कमी का अनुमान है। सीतारमण ने कहा कि निवेश और आर्थिक वृद्धि दर को गति देने के लिये ये कदम उठाये गये हैं। यदि कोई घरेलू कंपनी किसी भी प्रोत्साहन का लाभ नहीं लें तो उनके लिये कॉरपोरेट कर की दर 22 प्रतिशत होगी।

 उन्होंने कहा कि आयकर अधिनियम तथा वित्त अधिनियम में किये गये बदलाव अध्यादेश के जरिये अमल में लाये जाएंगे। उन्होंने कहा कि 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प चुनने वाली कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर देने की जरूरत नहीं होगी। वित्तमंत्री ने कहा कि एक अक्टूबर के बाद बनने वाली घरेलू विनिर्माण कंपनियां बिना किसी प्रोत्साहन के 15 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान कर सकेंगी। इनके लिये अधिशेषों और उपकर समेत कॉरपोरेट कर की प्रभावी दर 17.01 प्रतिशत होगी। उन्होंने कहा कि छूट का लाभ उठा रही कंपनियां इनकी अवधि समाप्त होने के बाद कम दर पर कर का भुगतान करने का विकल्प चुन सकती हैं।

सरकार ने प्रतिभूति लेन-देन कर की देनदारी वाली कंपनियों के शेयरों की बिक्री से हुए पूंजीगत लाभ पर बजट में प्रस्तावित उपकर को भी वापस लेने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों के लिये डेरिवेटिव समेत प्रतिभूतियों की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर धनाढ्य-उपकर समाप्त करने का भी निर्णय लिया गया है।

 वित्तमंत्री ने एक अन्य राहत देते हुए कहा कि जिन सूचीबद्ध कंपनियों ने पांच जुलाई से पहले शेयरों की पुनर्खरीद की घोषणा की है, उन्हें भी धनाढ्य-उपकर नहीं देना होगा। कंपनियों को अब दो प्रतिशत कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) इनक्यूबेशन, आईआईटी, एनआईटी और राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं पर खर्च करने की भी छूट दी गयी है। सीतारमण ने कर में छूट से मेक इन इंडिया में निवेश आने तथा रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने का भरोसा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि इससे अधिक राजस्व प्राप्त होगा।

वित्त मंत्री ने कही ये अहम बातें..

  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि यदि कोई घरेलू कंपनी किसी प्रोत्साहन का लाभ नहीं ले तो उसके पास 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प होगा।
  • जो कंपनियां 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का विकल्प चुन रही हैं, उन्हें न्यूनतम वैकल्पिक कर का भुगतान करने की जरूरत नहीं होगी। अधिशेषों और उपकर समेत प्रभावी दर 25.17 प्रतिशत होगी।
  • एक अक्टूबर के बाद बनी नयी घरेलू विनिर्माण कंपनियां बिना किसी प्रोत्साहन के 15 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान कर सकती हैं।
  • नयी विनिर्माण कंपनियों के लिये सभी अधिशेषों और उपकर समेत प्रभावी दर 17.01 प्रतिशत होगी।
  • अभी छूट का लाभ उठा रही कंपनियां इनकी अवधि समाप्त होने के बाद कम दर पर कर भरने का विकल्प चुन सकती हैं।
  • वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने घरेलू मैन्युफैक्चरिंग कंपनी के लिए कॉरपोरेट टैक्स में कटौती की घोषणा की है।
  • कैपिटल गेन टैक्स से सरचार्ज हटाने की भी घोषणा की।
  • प्रतिभूति लेन-देन कर की देनदारी वाली कंपनियों के शेयरों की बिक्री से हुए पूंजीगत लाभ पर बजट में प्रस्तावित अतिरिक्त अधिशेष नहीं होगा लागू।
  • फपीआई के पास मौजूद डेरिवेटिव समेत किसी भी प्रतिभूति की बिक्री से होने वाले पूंजीगत लाभ पर नहीं लगेगा धनाढ्य उपकर।
  • शेयरों की पुनर्खरीद की घोषणा पांच जुलाई से पहले करने वाली कंपनियों पर नहीं लगेगा टैक्स।
  • कॉरपोरेट कर की दर घटाने से राजस्व में सालाना 1.45 लाख करोड़ रुपये की कमी का अनुमान : सीतारमण
  • वित्त मंत्री ने कहा कि कर छूट से मेक इन इडिया‍ में निवेश आएगा, रोजगार सृजन और आर्थिक गतिविधियों में तेजी आएगी, इससे राजस्व बढ़ेगा।

जीएसटी काउंसिल बैठक से भी इंडस्ट्री को उम्मीदें..

ऑटो सेक्टर को और राहत की उम्मीद
ऑटो सेक्टर में लगातार 10वें महीने गिरावट देखने को मिली है और उसे राहत की उम्मीद है। वाहनों की बिक्री 31 साल के निचले स्तर पर पहुंच गई है। कारों की बिक्री तो अगस्त में पिछले साल के मुकाबले 41 फीसदी नीचे आई है। यह 1997-98 के बाद ऑटो सेक्टर का सबसे बुरा दौर है।

अटके आवासीय प्रोजेक्ट के लिए पैकेज संभव
सरकार नए प्रोत्साहन के तौर पर रियल एस्टेट की अटकी आवासीय परियोजनाओं के लिए भी पैकेज ला सकती है। सूत्रों का कहना है कि सरकार की कोशिश ऐसी परियोजनाओं के लिए कोष मुहैया कराने की है, ताकि लंबे समय से घर का इंतजार कर रहे खरीदारों को राहत मिल सके। कई प्रोजेक्ट के प्रबंधन का काम एनबीसीसी को सौंपा गया है, लेकिन फंड की कमी से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है। इसके लिए दस हजार करोड़ रुपये का फंड बनाया जा सकता है।

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