जवानी जिन्दाबाद

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जवानी जिन्दाबाद

9/24/2017 3:10:36 PM

-सुभाष चंदर- यही कोई चार-पांच सो साल पहले की बात होगी। जब सूर-सूर तुलसी ससि उड़गन केशवदास वाले कवि केशवजी को पनघट में खड़ी एक कन्या बाबा कहकर पुकार बैठी थी। बाबा कहना ही था। ऐसे सफेद जटा वाले को बाबा ना कहती तो क्या कहती। मगर कविवर उदास हो गये। और इसी उदासी के चलते उन्होंने रामचंद्रिका लिख डाली। सारी उमर उन पर श्वेउत केशों को लेकर बुढ़ापे का शोक सवार रहा। कवि केशवदास जी की तो खैर कविताओं में कट गयी। मगर युवातियों के मुंह से अंकल जी के संबोधन सुनने वाले उनके वंशजों को बड़ी फ्रिक सताई कि जवान कैसे हुआ जाए। एक जवानी लाओ सम्मेंलन आयोजित हुआ। सम्मेिलन में प्रस्ता व रखा गया कि कोई एक सदस्यक एक वर्ष तक तपस्याआ करे। बुढ़ापा पीड़ित संघ के एक भक्तम सदस्या ने वह जम्मा् अपने ऊपर लिया। लगातार एक वर्ष तक कड़ी तपस्याम की। तपस्या वाकई कड़ी थी। पूरे एक वर्ष के लिए उसने मद्य, सिगरेट, पान, तंबाकू, बीबी जैसे सब व्य सन त्यायग दिए। पूरे वर्ष दोनों समय बैंगन का भुर्ता, दाल, चार चपाती और कन्या पाठशाला के दर्शन में काटा। देवताओं को प्रसन्न होना ही था। जैसा कि रिवाज है कि देवता जब प्रसन्ना होते हैं तो उन्हें का देना पड़ता है। बोलेदृभक्त क्या मांगना है, जल्दी से एक वर मांग लो, कई जगह जाना है। भक्त की आंखों से आंसू छलक पड़े। आंसुओं के साथ ही बात भी छलक गयी। बोला, महाराज दे सकते हो तो जवानी का वरदान दे दो। मैं मरते दम तक जवान रहना चाहता हूं। देवता ने पहले अपने सफेद केशों को देखा, फिर भक्ता के। थोड़ी देर सोचने के बाद कुछ निर्णयलिया। फिर अपने सबादे की जेब से कुछ निकाला। भक्त। की मुट्ठी में रखा। मुट्ठी बंद की और अंतर्धान हो गए। देवता के जाने के बाद भक्तर ने मुट्ठी खोली तो देख उसमें एक शीशी थी, जिसके ऊपर देव वैद्य धन्वतन्त रि के औषधालय का लेबिल लगा हुआ था और नीचे लिखा था-चिरकाल तक जवान रहने की औषधि। शीशी के नीचे उसकी सेवन विधि लिखी थी। इसी औषधि को कालांतर में खिजाब के नाम से पुकारा गया। भक्त ने पूरे भक्तिभाव से इस दवा का प्रयोग किया। उनके मुंह से दांत और पेट से आंत तक गायब हो गयी लेकिन उनके बाल काले रहे। मरते दम तक वह जवान बना रहा। भगवान ने जैसी जवानी उसको दी वैसी ही सबको दें। वैसे भी जवानी कभी नहीं मरती। बस, एक उम्र के बाद जवानी की फसल बोनी पड़ती है। उसमें खोपड़ी की उपजाऊ जमीन पर मेंहदी के बीज रोपे जाएं, उसमें थोड़ा शैंपू वगैरह की खाद मिलाई जाए तो उत्पाहदन काफी चमकदार रहता है आजकल देश में उसकी खेती काफी बढ़िया चल रही है। सफेद बालों का स्टॉ क दिनों दिन खत्मस हो रहा है। इसीलिए जहां जवान लड़के बाहर क्रिकेट खेलते हैं, वहीं मां-बाप एक हाथ में ब्रुश लिए बालों पर फिदा हुसैनी पेंटिंग्स बनाते हैं। कहीं-कहीं तो सिर के बीच सीधे चंदामामा दिखते ही हैं कि अल्पपसंख्यनकों की तो किस्ममत में ही रंगे जाना लिखा है। कभी राजनीति उन्हें रंगती है तो कभी डाई। काले बाल यानी जवानी की पहली पहचान। बेशक चेहरे पे मकड़ियों ने जाला बुन रखा हो। पांवों में गठिया का दर्द हो चलेगा। दमे की शिकायत हो, तो भी चलेगी। पर खुदा ना ख्वास्तो बालों में अगर चांदी चमक गयी तो फिर मजा कहां रहा। ऊपर की सारी खुबियों के साथ यदि कोई अस्सी बरस का जवान सड़क पर चलतीकन्यास को देखकर होंठ सिकोड़कर मुंह से कोयल जैसी आवाज न निकाले तो मजा क्या है। जवानी को बचाने में पूरा देश लगा है। यह हमारा राष्ट्री य कर्तव्या है। अगर जवानी नहीं बची तो देश कैसे बचेगा। आप समझ ही गए होंगे कि बचाव का सूत्र काले बालों में ही टिका है। इसलिए बाल काले कीजिए, खुद को और देश को जवान बनाइए। बूढ़ा देश और बूढ़े आदमी कहां फबते हैं।

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