एक्ट ईस्ट पॉलिसी से भारत व दक्षिण-पूर्व एशिया के उम्मीदों का एकीकरण होगा

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राजगीर (बिहार), 11 जनवरी (वेबवार्ता)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को एक राजनयिक पहल से अधिक बताते हुए कहा कि इसका लक्ष्य केवल आर्थिक अवसरों को साझा करना नहीं, बल्कि इसका उद्देश्य भारत और दक्षिण पूर्व एशिया में रहने वाले लाखों लोगों के सपने और उम्मीदों का एकीकरण करना है।

राष्ट्रपति कोविंद ने नालंदा इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी, सेंटर फॉर स्टडी ऑफ रिलीजन एंड सोसाइटी, इंडिया फाउंडेशन और विदेश मंत्रालय की ओर से संयुक्त रूप से आयोजित चैथे अंतर्राष्ट्रीय धर्म-धम्म सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए कहा कि भारत, दक्षिण पूर्व एशिया और एशिया के अन्य भाग जहां धर्म-धम्म के पदचिह्न हैं और अतीत में एक आम स्रोत के साझीदार थे। उन्होंने कहा कि हमारा भाग्य भी अनिवार्य रूप से एककृदूसरे से जुड़ा हुआ है।

धर्म-धम्म परंपराओं में राज्य और सामाजिक व्यवस्था विषय पर आधारित इस तीन दिवसीय सम्मेलन के उद्घाटन समारोह के अवसर पर बिहार के राज्यपाल सत्यपाल मलिक, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी और श्रीलंका के विदेश मंत्री तिलक मारापना भी उपस्थित थे।

राष्ट्रपति कोविंद ने इस सम्मेलन के आयोजन के समय को उपयुक्त बताते हुए कहा कि हम एशियाई-भारत वार्ता साझेदारी की 25 वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। जनवरी का महीना भारत-आसियान संबंधों के उत्सव का महीना है। इस साल 26 जनवरी को नई दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर सभी 10 आसियान देशों के नेता मेहमान होंगे।

उन्होंने कहा कि उन्हें बताया गया है कि इस सम्मेलन में कई भारतीय विद्वानों के साथ प्रख्यात अंतर्राष्ट्रीय प्रतिनिधियों के बुद्धिमता भरे शब्दों को सुना जाएगा। वे दूरस्त महाद्वीपों जिनमें उत्तर-दक्षिण अमेरिका से आये प्रतिनिधि शामिल हैं, उनमें से अधिकांश एशिया- मध्य एशिया से दक्षिण पूर्व एशिया के विस्तार और विविधता का प्रतिनिधित्व करते हैं।

कोविंद ने कहा कि इस सम्मेलन में प्रतिनिधित्व करने वाले प्रत्येक देश और समाज अपने आप में अनूठे हैं फिर भी सभी किसी न किसी रूप में धर्म-धम्म परंपरा को ग्रहण करने वाले हैं। सभी ने भगवान बुद्ध का संदेश प्राप्त किया है – एक संदेश जिसने एशिया और उससे आगे की यात्रा की है।

उन्होंने यह भी कहा कि बौद्ध धर्म की यात्रा पैन-एशिया पंथ के रूप में और बाद में दुनिया भर में 2,500 साल पहले बिहार में ठीक इसी प्रकार से शुरू हुई थी। इस तरह सम्मेलन एक महान घटना का स्मरणोत्सव है जिसकी उत्पत्ति इस क्षेत्र में हुई थी। प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय की चर्चा करते हुए कोविंद ने कहा कि उक्त प्राचीन विश्वविद्यालय ज्ञान और बुद्धिमता का अजूबा था। यह भारत के इस क्षेत्र में स्थित था पर यह अंतरराष्ट्रीय प्रकृति का था। इसी तरह आज का नालंदा अंतराष्ट्रीय विश्वविद्यालय धर्म-धम्म पहचान का प्रतिनिधित्व कर रहा है और यह एक सर्वदेशीय उद्यम भी है। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की अवधारणा, स्थापना और विकास भारत और सहयोगी देशों के विशेष रूप से आसियान परिवार के देशों के प्रयासों के परिणाम हैं।

इससे पहले, प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने यह इच्छा व्यक्त की कि नालंदा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल कंफिलिक्ट रिसोलुशन केंद्र स्थापित किया जाए जिसके लिए उनकी सरकार भूमि प्रदान करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि इस केंद्र के कार्य करना शुरू कर देने पर विभिन्न देशों के प्रमुखों को आवास प्रदान करने के लिए भूमि का एक टुकड़ा निर्धारित किया गया है। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में 11 देशों के प्रतिभागी भाग ले रहे हैं और सम्मेलन के दौरान विभिन्न विषयों पर 60 पत्र प्रस्तुत किए जाने और उसपर चर्चा किए जाने की संभावना है।

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