अंतहीन रेगिस्तान की पृष्ठभूमि पर मंदिरों का सौंदर्य मनमोहक है

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राजस्थान के पाली जिले का एक छोटा सा गांव है। रणकपुर, उदयपुर और जोधपुर के बीच अरावली पर्वत श्रृंखला के पश्चिम की ओर स्थित है। यह गांव 15वीं सदी के रणकपुर जैन मंदिर के लिये प्रसिद्ध है, जिसका जैन अनुयायियों के बीच विशेष धार्मिक महत्व है। मंदिर की भव्यता इसके शानदार ऊंचे खंभों में दिखती है। अंतहीन रेगिस्तान की पृष्ठभूमि पर मंदिरों का सौंदर्य मनमोहक है।

रणकपुर और इसके आसपास
रणकपुर आने वाले पर्यटकों के बीच सूर्य भगवान को समर्पित सूर्य मन्दिर, जिसे सूर्य नारायण मंदिर के रूप में भी जाना जाता है, काफी लोकप्रिय है। मंदिर की दीवारों पर खगोलीय पिंडों, घोड़ों और योद्धाओं की नक्काशियां यहां के मूल निवासियों की कला को दर्शाती है जिन्होंने मंदिर के बहुभुजीय दीवारों का निर्माण किया था। इस मंदिर में भगवान सूर्य को एक रथ पर सवार देखा जा सकता है। रणकपुर आने वाले यात्री अक्सर सदरी अवश्य जाते हैं, जो जैनियों का एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है।

इस जगह का एक अन्य प्रमुख आकर्षण मुछ्छल महावीर मंदिर है, जो हिंदू भगवान शिव को समर्पित है। यह घनेराव से 5 किमी की दूरी पर कुम्भलगढ़ अभयारण्य में स्थित है। इस मंदिर की खास विशेषता यह है कि यहां हिंदू भगवान शिव को मूंछों के साथ दिखाया गया है। घनेराव गांव में कई हिंदू मंदिर हैं। क्षेत्र में पाये जाने वाले 11 जैन मंदिरों में से मुछ्छल महावीर मंदिर और गजानन्द मंदिर सबसे अधिक लोकप्रिय हैं।

रणकपुर से 6 किमी की दूरी पर स्थित, नरलाई गांव भी कई हिंदू और जैन मंदिरों के लिए जाना जाता है। मंदिर की वास्तुकला और इसके अंदर पाये जाने वाले भित्ति चित्र प्रशंसनीय हैं। क्षेत्र का एक अन्य प्रमुख आकर्षण कुम्भलगढ़ नाम का ऐतिहासिक स्थल है। इस जगह पर मेवाड़ का किला स्थित है जिसकी लंबी दीवारें क्षेत्र में दूर तक फैली हैं। समुद्र तल से 1100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, यह स्थान अरावली श्रृंखला और थार रेगिस्तान के शानदार रेत के टीलों का मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है।

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