डाइटीशियन: खानपान का ज्ञान और ध्यान

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आजकल लोग अपनी हेल्थ और फिटनेस को लेकर बहुत जागरूक हो गए हैं। वे यह भी समझ गए हैं कि केवल व्यायाम करने से शरीर को स्वस्थ नहीं रखा जा सकता। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित और पौष्टिक भोजन किया जाना भी जरूरी है। इससे न सिर्फ शरीर चुस्त-दुरुस्त रहता है, बल्कि कार्य करने की क्षमता भी बढ़ती है। दूसरी तरफ इसके अभाव में मनुष्य कुपोषण का शिकार हो जाता है और उसके अंदर क्रोध, तनाव, ईष्र्या व भय जैसे गुण पनपते हैं। इसके अलावा पाचन क्रिया के अध्ययन और प्रमुख शोधों से यह भी पता चला है कि शरीर में अधिकांश रिएक्शन व शारीरिक परेशानियां संतुलित आहार न लेने की वजह से होती हैं।

 

लोगों की बदलती जीवनशैली ने यह असंतुलन पैदा किया है और लोगों का स्वास्थ्य इससे प्रभावित हो रहा है। ऐसे में लोगों को एक ऐसे विशेषज्ञ की जरूरत पड़ती है, जो उन्हें इन समस्याओं के प्रति जागरूक करने के अलावा उन्हें सही राय दे सके। यह काम डाइटीशियन बखूबी अंजाम दे सकते हैं। इनका कार्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता का विश्लेषण करना और स्वास्थ्य सुधारने के लिए सलाह-मशविरा कर उपाय बताना है। इस पूरी विधा को आहार विज्ञान (डाइटेटिक्स) कहा जाता है। इस प्रक्रिया में केवल खाने से पहले ही आहार की गुणवत्ता का निर्धारण नहीं किया जाता, बल्कि आहार के शरीर पर पडम्ने वाले प्रभाव का भी विश्लेषण किया जाता है।

 

कब रखें इस प्रोफेशन में कदम

डाइटीशियन के क्षेत्र में जो भी करियर ऑप्शन हैं, वे ग्रेजुएशन व पोस्ट ग्रेजुएशन के बाद ही सामने आते हैं। इसके लिए छात्रों को गृह विज्ञान, न्य्रूटिशन, फूड साइंस/टेक्नोलॉजी से संबंधित कोर्स करने अनिवार्य हैं। बैचलर कोर्स के लिए छात्रों को गृह विज्ञान विषय के साथ बारहवीं पास होना जरूरी है। कुछ संस्थान ऐसे भी हैं, जो बारहवीं के बाद चार वर्षीय फूड टेक्नोलॉजी का कोर्स कराते हैं। इसके बाद मास्टर कोर्स में दाखिला लिया जा सकता है। एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा कोर्स भी छात्रों के आकर्षण का केंद्र बना रहता है। इसमें प्रवेश पाने के लिए फूड साइंस, होम साइंस, बायोटेक्नोलॉजी आदि में बैचलर होना आवश्यक है।

 

कुछ प्रमुख कोर्स

बीएससी इन न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स

एमएससी इन न्यूट्रिशन एंड डाइटेटिक्स

एमएससी फूड एंड न्यूट्रिशन/क्लिनिकल न्यूट्रिशन

पीजी डिप्लोमा इन डाइटेटिक्स एंड पब्लिक हेल्थ न्यूट्रिशन

डिप्लोमा/पीजी डिप्लोमा इन डाइटेटिक्स

पीजी डिप्लोमा इन क्लिनिकल न्यूट्रिशन

पीएचडी इन न्यूट्रिशन

 

कई तरह की स्किल आवश्यक

एक डाइटीशियन का काम जीवन स्तर ऊंचा उठाने के लिए खानपान के तौर-तरीकों से अवगत कराने के अलावा अच्छे स्वास्थ्य के मद्देनजर जरूरी चीजों को बढ़ावा देना होता है। ये अपने ज्ञान व शोध के आधार पर खाद्य पदार्थों की सूची तैयार करते हैं और जरूरतमंदों को उनके शरीर की मांग के हिसाब से राय देते हैं। इसलिए एक अच्छे डाइटीशियन को खानपान में रुचि होने के साथ-साथ उसे तैयार करने की विधि की जानकारी होनी चाहिए। कम्युनिकेशन स्किल, धैर्य, परिश्रम आदि गुण भी समय-समय पर उसे सहायता दिलाते हैं।

 

प्रमुख कार्य क्षेत्र

क्लिनिकल डाइटीशियन

कम्युनिटी डाइटीशियन

मैनेजमेंट डाइटीशियन

कंसल्टेंट डाइटीशियन

थैरेप्यूटिक न्यूट्रिशन

पब्लिक हेल्थ न्यूट्रिशन

 

रोजगार की संभावनाएं

इसमें प्राइवेट व सरकारी दोनों ही सेक्टर में नौकरियां मिलती हैं। स्कूल, हॉस्पिटल, हेल्थ सेंटर, स्पोट्र्स क्लब, एनजीओ, क्रूज लाइन व जिम आदि जगहों पर डाइटीशियनों की नियुक्ति की जाती है।

 

हॉस्पिटैलिटी सेक्टर बड़े रोजगार प्रदाता के रूप में जाना जाता है, जबकि सरकारी क्षेत्रों में आईसीडीएस, एनएचआरएम, आईसीएमआर, पीएचएफआई आदि जगहों पर काम मौजूद है। आजकल कॉरपोरेट घराने अपने यहां न्यूट्रिशनिस्ट अथवा डाइटीशियनों की नियुक्ति कर रहे हैं, ताकि कर्मचारियों की स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतों को दूर किया जा सके और लोग तंदुरुस्त रहें। चाहें तो अपना सेंटर खोल कर भी लोगों को स्वास्थ्य से जुड़ी जानकारी प्रदान कर सकते हैं। अच्छे प्रोफेशनल्स के लिए विदेशों में व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं।

 

मिलने वाली सेलरी

इसमें एक डिप्लोमाधारी डाइटीशियन को 15-20 हजार रुपए प्रतिमाह आसानी से मिल जाते हैं, जबकि मास्टर कोर्स करने के बाद प्रोफेशनल्स को 20-22 हजार रुपए प्रतिमाह मिलते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ-साथ यह सेलरी भी बढ़ जाती है। यदि वे अपना सेंटर खोल कर कंसल्टेंट का काम कर रहे हैं तो फिर आमदनी की रूपरेखा उनकी प्रसिद्धि पर निर्भर करती है। बड़े हेल्थ सेंटर डाइटीशियन को मोटी रकम पर नियुक्त करते हैं, जबकि विदेशों में काम करने अथवा अपना सेंटर खोलने वालों के लिए आमदनी की कोई निश्चित सीमा नहीं होती।

 

फायदे व नुकसान

कम मेरिट पर भी मिलता है प्रवेश

डिप्लोमा कोर्स से भी चल जाता है काम

कोर्स से मिलती है रोचक जानकारी

अन्य प्रोफेशन की तुलना में कम सेलरी पैकेज

कम क्षेत्रों में रोजगार की संभावना

ज्यादा ट्रैवल करने पर ही बढ़ती है आमदनी

 

प्रमुख संस्थान:-

 

-दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

-इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

-गुरु जम्भेश्वर यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, हिसार

-पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, पंजाब

-इंस्टीटय़ूट ऑफ होम इकोनॉमिक्स, नई दिल्ली

-इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च, नई दिल्ली

-जीबी पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, उत्तराखण्ड

-यूनिवर्सिटी ऑफ मुंबई, मुंबई

-सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजिस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट, मैसूर

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