बिहारी कहने को गर्व महसूस करें पूर्वांचल के लोग: कुमार संजाॅय सिंह

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बिहारी कहने को गर्व महसूस करें पूर्वांचल के लोग: कुमार संजाॅय सिंह

2/14/2017 3:52:51 PM

दिल्ली में दूसरी भाषाओं के बोलने वाले लोगों से कहीं ज्यादा है मैथिली-भोजपुरी बोलने वाले लोगों की संख्या। लेकिन इस भाषा को आज तक वह सम्मान नहीं मिल सका जिसकी वह हकदार है। लेकिन अब मैथिली भोजपुरी को दूसरी भाषाओं की तरह बराबरी का हक दिलाने की ठानी है दिल्ली सरकार की मैथिली भोजपुरी अकादमी के उपाध्यक्ष कुमार संजॉय सिंह ने। कुमार देश के जाने-माने लेखक पत्रकार भी रहे हैं। लंबे समय तक उन्होंने न्यूज चैनलों-अखबारों में अपनी सेवाएं दी हैं। उन्होंने दम तोड़ती कई भाषाओं पर शोध भी किया है। हाशिए पर मैथिली भोजपुरी भाषा के संबंध में अकादमी के उपाध्यक्ष कुमार संजॉय सिंह से वरिष्ठ पत्रकार रमेश ने विस्तृत बातचीत की। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश। मैथिली-भोजपुरी भाषा हाशिए पर रही, इसके पीछे क्या वजह है? मैथिली-भोजपुरी जुबान बहुत ही मधुर और मीठी भाषा है। कोई भी सुनकर इस भाषा से मोहब्बत कर लेता है। लेकिन मुकम्मल पहचान दिलाने वालों की अभी तक कमी रही है। जो मैथिली-भोजपुरी भाषा को बढ़ावे देना चाहते थे उन्हें रोका है। या, फिर उन्हें प्रत्तोसाहित नहीं किया गया। इस भाषा को बोलने वाले लोग अपनी मेहनत व ईमानदारी से हर क्षेत्र में अपना मुकाम बना रहे हैं। दिल्ली सरकार मैथिली व भोजपुरी भाषा को बढ़ावा देने पर जोर दे रही है। खासकर, युवाओं में इसके प्रचार प्रसार को लेकर जोर दिया जा रहा है। आज भी अमेरिका व यूरोप जैसे देशों में भारतीयों के बीच क्षेत्रीय भाषा के रचनाकारों को काफी सम्मान दिया जाता है, लेकिन यही भारत में वह उपेक्षित है। लेकिन दिल्ली की मैथिली-भोजपुरी अकादमी कोई कसर नहीं छोड़ेगी। इस भाषा को बढ़ावा मिले, आपके क्या प्रयास कर रहे हैं? अकादमी की तरफ से कई तरह के आयोजन किए जा रहे हैं। उनका का मुख्य उद्देश्य समाज के लोगों को जोड़ना है। इससे मैथिली व भोजपुरी भाषा को बढ़ावा मिलेगा। कवि सम्मेलनों का भी आयोजन किया जा रहा है जिससे पूर्वाचलवासियों के बीच आपसी सौहार्द को बढ़ाने में भी मददगार साबित होगा। राजधानी में इन भाषाओं को बढ़ावा देने के उद्देश्य से और लोगों के बीच इसकी जागरूकता बढ़ाने के लिए मैथिली भोजपुरी अकादमी की ओर से आयोजित संगीत उत्सव भी आयोजित होगा। इसके अलावा अकादमी की ओर से मैथिली भोजपुरी को बढ़ावा देने के लिए तीन पुरस्कार भिखारी ठाकुर सम्मान, विद्यापति सम्मान और पूर्वाचल सम्मान आरंभ किया गए है, जिसमें एक-एक लाख रुपये दिए जाएंगे। अकादमी इसके अलावा भी तमाम नाटक, नौटंकी, गीत-संगीत व उत्सवों का आयोजन करेगी जिसमें पूर्वांचल की संस्कृति और उसका कल्चर साफ दिखाई देगा। इसके अलावा जो भी संभव होगा उसे किया जाएगौ। पूरब के लोग दिल्ली में रोजगार की तलाश में आते हैं, पहले भाषा को लेकर इन्हें परेशान किया जाता था? पूरब के लोगों को बिहारी कहके संबोधित किया जाता रहा है। मैं समझता हूं पूरब के लोग इसे बुरा न माने, बल्कि गोरव महसूस करें। ठीक उसी तरह जैसे पंजाबियों को पंजाबी कहा जाता है। रही बात रोजगार की, तो इस समय पूरब के लोगों की संख्या दूसरे प्रांतों के रहने वाले लोगों से कहीं ज्यादा है। एक समय था जब पूर्वांचल के लोग दिल्ली में नहीं आते थे। कोलकाता में जूट मिल का बंद होना, नेपाल में कारखानों का बंद होना। बिहार में भी कई मिले बंद हुई। इस वजह से वहां के लोगों का पलायन दिल्ली हुआ। लेकिन इस सच्चाई को भी अब नहीं नकारा जा सकता। अगर पूर्वांचल के लोग दिल्ली से चले गए तो यहां का जीवन अस्त-व्यस्त हो जाएगा। हर छोटे से बड़ा काम पूरब के लोग कर रहे हैं। अब यह लोग बेधड़क अपनी भाषा में बतियाते हैं। अब कोई इन्हें परेशान नहीं करता। माहौल पहले से जुदा हैं। दिल्ली में पूर्वांचल के लोगों के लिए हालात अब बदले हैं? राजधानी दिल्ली पूरे देश के लोगों के लिए है। फिलहाल अब यहां जातिवाद व क्षेत्रवाद के आधार पर किसी से भेदभाव नहीं किया जाता। दिल्ली अब पूर्वांचलियों के लिए कर्मभूमि बन चुकी है। अपना घर परिवार छोड़कर जो लोग यहां आते हैं उन्हें पूरा मान-सम्मान दिया जाता है। इसलिए अब समय की मांग है कि भोजपूरी को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया जाना चाहिए, ठीक उसी तर्ज पर अन्य अधिक बोली जाने वाली भाषाओं को भी यही मान मिलना चाहिए। हाल ही में दिल्ली के द्वारका सेक्टर-3 में नौवें विश्व भोजपुरी सम्मेलन में बिहार के बक्सर से बीजेपी सांसद अश्वनी चौबे ने भरोसा दिलाया है कि भोजपुरी को अष्टम अनुसूची में शामिल करने को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय से स्वीकृति पत्र जारी हो चुका है। बस अधिसूचना ही बाकी है। कुछ लोगों की आपत्ति है कि भोजपुरी को आठवीं अनुसूची में शामिल करने से हिंदी कमजोर होगी? यह बेबुनियाद बातें है। भोजपुरी सिर्फ भाषा नहीं बल्कि हमारी संस्कृति है। हिंदी की जगह कोई नहीं ले सकता। लगभग 25 करोड़ लोग भोजपुरी बोलते हैं। विदेशों में भी लाखों के तादात में लोग रहते हैं। इस लिहाज से इस भाषा को यह सम्मान मिलना चाहिए। देशज बोलियों और भाषाओं के संरक्षण और प्रोत्साहन की काफी जरुरत है। (जैसा रमेश ठाकुर से दिल्ली सरकार की मैथिली-भोजपुरी के उपाध्यक्ष कुमार संजॉय सिंह ने कहा)

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