एफडीआई नीति में संशोधनों को मोदी कैबिनेट से मंजूरी

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नई दिल्ली, 10 जनवरी (वेबवार्ता)। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में केन्‍द्रीय मंत्रिमंडल ने एफडीआई नीति में अनेक संशोधनों को अपनी मंजूरी दी है। इन संशोधनों का उद्देश्‍य एफडीआई नीति को और ज्‍यादा उदार एवं सरल बनाना है, ताकि देश में कारोबार करने में आसानी सुनिश्चित हो सके। इसके परिणामस्‍वरूप प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) का प्रवाह बढ़ेगा जो निवेश, आय और रोजगार में उल्‍लेखनीय योगदान करेगा। एफडीआई आर्थिक विकास का एक प्रमुख वाहक और देश में आर्थिक विकास के लिए गैर-ऋण वित्त का एक स्रोत है। सरकार ने एफडीआई के संबंध में एक निवेशक अनुकूल नीति क्रियान्वित की है जिसके तहत ज्‍यादातर क्षेत्रों/गतिविधियों में स्‍वत: रूट से 100 प्रतिशत तक एफडीआई की अनुमति दी गई है। हाल के महीनों में सरकार ने अनेक क्षेत्रों (सेक्‍टर) यथा रक्षा, निर्माण क्षेत्र के विकास, बीमा, पेंशन, अन्‍य वित्तीय सेवाओं, परिसंपत्ति पुनर्निर्माण कंपनियों, प्रसारण, नागरिक उड्डयन, फार्मास्‍यूटिकल्‍स, ट्रेडिंग इत्‍यादि में एफडीआई संबंधी नीतिगत सुधार लागू किए हैं। सरकार द्वारा उठाए गए कदमों के परिणामस्‍वरूप देश में एफडीआई के प्रवाह में उल्‍लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्ष 2014-15 के दौरान कुल मिलाकर 45.15 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रवाह हुआ है,जबकि वर्ष 2013-14 में यह प्रवाह 36.05 अरब अमेरिकी डॉलर का हुआ था। वर्ष 2015-16 के दौरान देश में कुल मिलाकर 55.46 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश हुआ। वित्त वर्ष 2016-17 में कुल मिलाकर 60.08 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश प्राप्‍त हुआ, जो अब तक का सर्वकालिक उच्‍चतम स्‍तर है। यह महसूस किया गया है कि देश में इससे भी ज्‍यादा विदेशी निवेश को आकर्षित करने की क्षमता है, जिसे एफडीआई व्‍यवस्‍था को और ज्‍यादा उदार एवं सरल बनाकर प्राप्‍त किया जा सकता है। तदनुसार, सरकार ने एफडीआई नीति में अनेक संशोधन करने का निर्णय लिया गया है।

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