​​​​​​​​​​​​​​​​दया ट्रस्ट द्वारा आयोजित जीएसटी काउंसिल सेमिनार में सिम्स स्टूडेंटस ने लिया भाग

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नई दिल्ली, 23 दिसंबर (वेबवार्ता)। भारत सरकार द्वारा जुलाई 2017 से देश में टैक्स की नई पद्दति जीएसटी लागू करने से व्यापारियों को कई दुविधाएं हो रही है। जिसका व्यापार पर नकारात्मक असर हो रहा है। और ग्राहक भी परेशान है। इसके स्पष्टीकरण के लिए सरकार द्वारा व्यापारी वर्ग तथा युवा विद्यार्थियों के साथ विभिन्न स्तर पर सेमीनार का आयोजन किया जा रहा है। इसी के तहत दया ट्रस्ट द्वारा जंतर मंतर स्थित केरला हाउस में जीएसटी से सम्बन्धित एक सेमीनार का आयोजन किया गया। दिल्ली स्थित सिम्स हॉस्पिटालिटी एंड होटल मैनेजमेंट के विद्यार्थियों को आमंत्रित किया गया।

इस सेमिनार में लोकसभा सांसद प्रो रिचर्ड हे, जीएसटी काउंसिल के विशेष संयुक्त सचिव आईएएस अरुण गोयल, संयुक्त सचिव धीरज रस्तोगी, समाजसेवी श्रीनिवासन, दया ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रसन्ना पिल्लई, निदेशक जी श्रीदाथन व सिम्स के निदेशक बिलाल हुसैन, न्यू अशोक टाइम्स के उप सम्पादक समीर सिद्दीकी उपस्थित थे।

अधिकारियों द्वारा शुरुआत में मौखिक तथा बाद में प्रोजक्टर द्वारा जीएसटी की संरचना व महत्व के बारे में बताया, और देश की जनता को इससे होने वाले कई लाभों के बारे में विवरण सहित उदाहारण देकर समझाया गया। उन्होंने कहा की जो लोग टैक्स की चोरी करते है, सरकार का लक्ष्य उन लोगों पर शिकंजा कसना है। सख्त निर्देशों और प्रावधानों के बिना एक देशव्यापी कर सुधार काम नहीं कर सकता है। जीएसटी परिषद ने इस नए कर व्यवस्था को तीन श्रेणियों में विभाजित करके इसे लागू करने की एक विधि तैयार की है। सरकार ने जीएसटी के अंतर्गत तीन तरह के टैक्स लागू किए है। सीजीएसटी, केंद्र सरकार, एसजीएसटी राज्य में बिक्री के लिए राज्य सरकारों और आईजीएसटी जहां अंतरराज्यीय बिक्री के लिए केंद्र सरकार द्वारा राजस्व एकत्र किया जाएगा।

सिम्स के स्टूडेंट्स ने जीएसटी से सम्बन्धित अधिकारियों से कई प्रश्न किये। मगर प्रत्येक प्रश्नकर्ता द्वारा पोर्टल के विरुद्ध शिकायतें मुख्य थी। सुमित ने टैक्स में संशोधन के लिए प्रश्न किया। रिजवान ने कहा कि सरकार अगर देश का हित चाहती है तो जीएसटी की सरल ढंग से शुरुआत क्यों नही की? आज इसके लिए व्यापारियों को कई समस्याओं का सामना करना पड रहा है। इमरान ने पूछा कि इस प्रणाली के तहत सोफ्ट्वेअर द्वारा स्वचालित चालान करने की सुविधा क्यों नही दी गई।

श्वेता पुरोहित ने तो जीएसटी से व्यापारियों को होने वाली असुविधाओं पर प्रश्नों की अम्बार लगा दी। निशाने पर सबसे पहले जीएसटी के लिए प्रयोग किये जाने वाला अधूरा सोफ्ट्वेयर था। जिसमें मुख्य प्रश्न था कि करदाता अगर गलती से सीजीएसटी के बजाय एसजीएसटी या आईजीएसटी जैसे दूसरे खातों में कर का भुगतान करता है तो उस रकम को सही खाते में स्थानान्तरण या वापसी का प्रावाधान क्यों नहीं रखा? विभाग द्वारा सोफ्ट्वेअर सर्वर कुछ निश्चित दिनों के लिए नहीं बल्कि हमेशा खुला होना चाहिए। ताकि व्यापारी समय से पहले कभी भी अपना टैक्स जमा कर सके।

तीसरा महत्वपूर्ण प्रश्न था कि सरकार रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं पर तो इतना कर लगा रही है। जिससे आम आदमी की जेब पर बहुत बोझ पडा है। मगर शराब जैसी मादक वस्तुओं को इससे अलग क्यों रखा? अधिकारी इन प्रश्नों का संतोषजनक उत्तर नहीं दे पाए और समय समाप्ति का कारण देकर चर्चा को विराम दे दिया।

सिम्स के निदेशक बिलाल हुसैन ने इस सेमीनार में सिम्स इंस्टिट्यूट को शामिल होने का अवसर प्रदान करने के लिए दया ट्रस्ट व उपस्थित सभी अधिकारियों का तहे दिल से धन्यवाद किया। सरकार द्वारा शुरू की गई जीएसटी प्रणाली को देश हित में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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