स्टेंट-कीमत की सीमा निर्धारित करना मरीजों के लिए हानिकारक : डा.अग्रवाल

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नई दिल्ली, 14 फरवरी (वेबवार्ता)। हार्ट केयर फाउंडेशन के अध्यक्ष डा. केके अग्रवाल ने कहा है कि स्टेंट एक दवा है और इसे ड्रग्स व कास्मेटिक एक्ट के तहत लाया जाना चाहिए। लेकिन इसे नेशनल लिस्ट ऑफ एसेंसियल मेडिसीन में डाला गया है। हालांकि यह अच्छी बात है। लेकिन इसके साथ ही इस तरह के सभी आइटमों को इस सूची में डाला जाना चाहिए। साथ ही डा. अग्रवाल ने कहा कि इन स्टेंट्स के दाम के घटने से डाक्टर अपनी खोई हुई राशि की भरपाई अन्य माध्यम से करेंगे। इसका नुकसान मरीजों को ही भुगतना होगा। इससे मरीजों के साथ नाइंसाफी होगी।

जानकारी के मुताबिक ड्रग मिश्रित स्टेंट की कीमत पर तो नेशनल फार्माश्यूटिकल प्राइसिंग अथारिटी ने सीलिंग लगा दिया है। दूसरी तरफ मेटल स्टेंट की कीमत को बढ़ा दिया गया है। हाल ही में इस क्षेत्र में अधिकारिता रखने वाले पक्षों व नेशनल फार्माश्यूटिकल प्राइसिंग अथारिटी के बीच कई स्तर की बातचीत के बाद ड्रग मिश्रित स्टेंट की कीमत में 1710 रुपए की कमी कर दी गई लेकिन मेटल स्टेंट की कीमत की कीमत में 400 रुपए की बढ़ोतरी कर दी गई। यह दर 31 मार्च 2019 तक लागू रहेगा। इस आदेश के जारी होने पर सभी स्टेंट निर्माता को अपने दर को घटाना या बढ़ाना पड़ेगा।

उल्लेखनीय है कि स्टेंट एक छोटा तार है जिसे धमनी में डालकर रक्त की गति को संतुलित किया जाता है। यह हृदय से जुड़ी कमजोर धमनियों को भी मजबूती प्रदान करता है।

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