डूटा हड़ताल जारी,कालेजों में धरने प्रदर्शन,शिक्षकों की भूख हड़ताल

0
42

नई दिल्ली, 21 मार्च (अनवार अहमद नूर)। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (डूटा) की घोषित पांच दिवसीय (19 से 23 मार्च) हड़ताल जारी है हर दिन इसका असर बढ़ता ही जा रहा है कक्षाओं का बहिष्कार, रैली, धरना–प्रदर्शनों के साथ साथ अब स्थिति शिक्षकों की भूख हड़ताल पर आ गई है यूजीसी के पांच मार्च को जारी किये गये पत्र के विरोध में बनाई गयी संयुक्त एक्शन कमेटी के आह्वान पर दिल्ली विश्वविद्यालय के शिक्षक भूख हड़ताल पर बैठे और उन्होंने एक रैली भी निकाली एक्शन कमेटी के डा० संजय कुमार का कहना है कि आरक्षण नीति में बदलाव से सम्बन्धित पांच मार्च को जारी यूजीसी की अधिसूचना सरकार की आरक्षण नीति में पलट जाने को दर्शा रहा है।

पत्र में यूजीसी ने विश्वविद्यालयों को विश्वविद्यालय/कालेज को इकाई बनाये जाने की अभी तक जारी प्रणाली को बदलकर डिपार्टमेंट/सब्जेक्ट को इकाई बनाते हुए फिर से आरक्षण रोस्टर बनाने के कालेजों को दिशा निर्देश जारी किये हैं यूजीसी का यह निर्देश पुरी तरह से सामाजिक न्याय के सवालों को पीछे धकेलने वाला है इसका हम विरोध जारी रखेंगे डूटा अध्यक्ष राजीव रे ने इस सम्बन्ध में कहा है कि यूजीसी का पत्र पूरी शिक्षण प्रणाली पर प्रभाव डाल रहा है और एमएचआरडी की ग्रांट कटौती से शिक्षक ही नहीं बल्कि छात्र भी पिस रहे हैं इसलिए छात्र भी शिक्षकों का साथ देने के लिए धरने में शामिल हो रहे हैं।

कक्षाओं का बहिष्कार, रैली, धरना–प्रदर्शन सहित भूख हड़ताल पर उतर आये डूटा की मांग है कि यूजीसी का निर्धारित 70:30 फार्मूले को लागू नहीं किया जाए, सेल्फ कोर्सेज का बोझ कालेजों पर नहीं लादा जाये ,हेफा के माध्यम से कालेजों को एजुकेशन लोन देकर निजीकरण की ओर डीयू को नहीं धकेला जाये।

शिक्षकों का मानना है कि यदि यूजीसी 70 प्रतिशत ग्रांट देगी और 30 प्रतिशत ग्रांट का प्रबंध कालेजों को करना पड़ेगा तो कालेज इसके लिए छात्रों को दबायेंगे उनकी फीस बढ़ाएंगे शिक्षा महंगी होगी परिणाम छात्रों और अभिभावकों को भुगतना पड़ेगा वहीं हेफा प्रोग्राम के तहत केद्रीय विश्व विद्यालयों में चलने वाले कालेजों को इन्फ्रास्ट्रक्चर को बढ़ाने के लिए ऋण लेना पड़ेगा जो कि भविष्य में खतरनाक होगा,अधिकतर कालेज निजीकरण की राह पर चल पड़ेंगे।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here