अजमेर उर्स पर जमीयत उलेमा ए हिंद की ओर से मेडिकल कैंप का उदघाटन

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हम मुस्लिम समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का पैग़ाम देना चाहते हैं : मौलाना महमूद मदनी

नई दिल्ली/अजमेर शरीफ, 16 मार्च (अनवार अहमद नूर)। ख्वाजा की नगरी अजमेर शरीफ में जमीयत उलेमा ए हिंद के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने मेडिकल कैंप का उद्घाटन किया। यह कैम्प दस दिन तक जारी रहने वाले उर्स के दौरान ज़ायरीन के लिए चिकित्सा सेवाएं प्रदान करेगा। उद्घाटन समारोह में अंजुमन खाजगान के सदर शेख अलीमुद्दीन चिश्ती, नसीरुद्दीन चिश्ती, अब्दुल वाहिद चिश्ती अंगारा सहित दरगाह की अनेक बड़ी हस्तियां मौजूद थीं। सभी ने एक साथ, वहां एम्बुलेंस को हरी झंडी भी दिखाई।

इस अवसर पर मौलाना महमूद मदनी ने अपने संबोधन में कहा कि ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती अजमेरी रहमतुल्लाह अलैहि इस देश की महान साझा विरासत का हिस्सा हैं। हजरत गरीब नवाज अपने अच्छे किरदार से लाखों दिलों को मोहित किया और उन्होंने हमेशा एकता और भाईचारा की शिक्षा दी और अपने संदेश से सारी मानवता के बीच समानता और शांति को स्थापित किया। उन्होंने अपने व्यवहारिक जीवन से यह साबित किया कि तसव्वुफ न मात्र ज्ञान है और न कोई अलग पद्धति है, बल्कि यह खुदा के प्रति प्रेम और बिना किसी भेद-भाव उसके सारे बन्दों की सेवा का नाम है। हजरत गरीब नवाज कहते थे कि मूल फकीरी यह है कि नदी जैसी उदारता व सख़ावत, सूरज की तरह सब से स्नेह और पृथ्वी जैसी विनम्रता हो क्योंकि ये तीनों चीज़ें कोई भेदभाव किए बिना सबको अपना सहारा देती हैं।

मौलाना मदनी ने कहा कि जमीयत उलेमा ए हिंद हज़रत गरीब नवाज की इसी विचारधारा पर क़ायम है और उसने अपने एक सौ साल के काल में समाज सेवा के रास्ते इस्लाम के अमन व भाई चारे के इसी संदेश को आम करने की कोशिश की है। मौलाना मदनी ने इस बात पर जोर दिया कि सूफीवाद को मात्र किसी रस्म तक सीमित न किया जाए बल्कि उसके आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाए क्योंकि आज के समय में नफरत और सांप्रदायिकता के उन्मूलन में इसकी बड़ा भूमिका होगी। मौलाना मदनी ने कहा कि उन्हें इस धरती से बहुत प्यार मिला है, यह जगह है जहां से दिलों को जोड़ने का पैग़ाम जाता है।उन्होंने कहा के यहाँ से हम मुस्लिम समाज के सभी वर्गों को जोड़ने का पैग़ाम देना चाहते हैं. हमने पिछले वर्ष चिकित्सा शिविर शुरू किया था, और ये हर साल जारी रहेगा।

हाजी सैयद वाहिद हुसैन चिश्ती अंगरा, सचिव अंजुमन खुद्दाम सैयद जादगान दरगाह अजमेर शरीफ ने अपने संबोधन में कहा कि यह ऐतिहासिक तथ्य है कि जमीयत के पूर्व महासचिव मौलाना हिफ़़जुर्रहमान सियोहारवी ने विभाजन के बाद के अशांत व उग्र माहौल में अजमेर शरीफ में उर्स व अन्य दैनिक प्रक्रियाओं की दौबारा शुरू कराया था। इस अवसर पर दरगाह से जुड़े अनेक वरिष्ठ व्यक्तियों के अलावा मौलाना हकीमुद्दीन कासमी जमीयत उलेमा ए हिंद, हाफ़िज़ मुहम्मद अमीन अध्यक्ष, जमीयत उलेमा राजस्थान, मौलाना मुइ़जुद्दीन अहमद, हबीब फारूकी, मौलाना शब्बीर अहमद उपाध्यक्ष जमीयत उलेमा राजस्थान आदि ने भी संबोधित किया।

मौलाना शब्बीर अहमद ने बताया कि जमीयत का यह मेडिकल कैंप उर्स के बाद भी 30 मार्च तक जारी रहेगा। इसमें आठ एम्बुलेंस और आवश्यक दवाओं सहित डॉक्टरों की एक टीम मौजूद रहेगी। इसके अलावा हमारे स्वयंसेवी सैवा में मौजूद रहेंगे। ज़़रूरत पडने पर गंभीर बीमारों को तुरंत जिला अस्पताल या राजधानी जयपुर के अस्पताल भेजने की व्यवस्था करेंगे। उक्त हस्तियों के अलावा विशेष रूप से मौलाना यूनुस सीकर, मौलाना अय्यूब, मुफ्ती हारून, मुफ्ती शकील अहमद चुरू, मौलाना असद, मौलाना अय्यूब और मौलाना अलीमउद्दीन अजमेरी मौजूद रहे।

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