गलती का एहसास

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-रेनू सैनी-

रिया, फैजल और अमन आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। तीनों पढ़ाई के साथ-साथ खेल-कूद, डांस और नाटक के कार्यक्रमों में भी आगे रहते थे। फैजल गणित में बहुत होशियार था।

एक दिन अमन ने उससे एक सवाल समझाने को कहा। फैजल उस समय साइंस का प्रोजेक्ट बना रहा था। वह बोला, ‘यार, मेरा थोड़ा सा काम रह गया है। इसे खत्म कर लूं, फिर तुझे समझाता हूं। बीच में एकाग्रता भंग होने से काम अधूरा रह जाएगा।’ यह कहकर फैजल अपने काम में लग गया। लेकिन अमन को फैजल का यह जवाब ठीक नहीं लगा। उसे लगा कि वह गणित में उसके मुकाबले कुछ कमजोर है और फैजल उसे ऐसा व्यवहार करके यही दर्शा रहा है।

कुछ देर बाद फैजल बोला, ‘ला अमन, अब तेरी प्रॉब्लम हल करता हूं।’ लेकिन अमन के मन में अब फैजल के लिए गुस्सा था। वह बोला, ‘अब मेरा सवाल हल हो गया है। जब तुमसे पूछा तो तुम व्यस्त थे।’

उस दिन से अमन को फैजल से चिढ़ हो गई। जब भी कोई टीचर फैजल की तारीफ करता तो अमन ईष्र्या से जल उठता। फैजल इस बात से अंजान था। एक दिन गणित की अनुष्का मैडम ने कक्षा में गणित का टेस्ट लिया। पीरियड खत्म होने के बाद वह सभी बच्चों की कॉपियां लेकर जांचने के लिए जाने लगीं तो संतुलन गड़बड़ाने के कारण उनसे कुछ कॉपियां नीचे गिर गईं। तभी अमन ने झुककर कॉपियां उठा लीं और स्टाफ रूम की ओर चल पड़ा। अचानक उसकी नजर कॉपियों पर गई तो वह यह देखकर दंग रह गया कि फैजल ने बहुत ही सुंदर ढंग से सभी सवाल हल किए हुए थे। उसे लगा कि फैजल को अपने गणित में तेज होने का बहुत गुरूर है। वह उसके इस गुरूर को निकाल देगा। यह सोचकर उसने चुपके से फैजल की कॉपी निकाली और मैडम की नजर बचाकर बहुत ही सफाई से उसे अपने साथ ले आया। यह सब करते हुए उसका दिल जोर-जोर से धड़क रहा था। इसके बाद वह पार्क में आया और वहां पर उसने फैजल की कॉपी की चिन्दी-चिन्दी कर उसे डस्टबिन में डाल दिया। इसके बाद वह आराम से अपनी कक्षा में आकर बैठ गया। इस समय अमन के चेहरे पर हवाइयां उड़ रही थीं, जो ये बता रही थीं कि उसने गलत काम किया है। खुद अमन भी अंदर ही अंदर परेशान था।

अगला पीरियड हिन्दी का था। तभी कुछ ही देर में हिन्दी की अमृता मैडम आ गईं। सभी बच्चों ने उनका अभिवादन किया। अमृता मैडम बोलीं, ‘तीन दिन बाद दो अक्टूबर है। तुम में से कोई बता सकता है कि गांधी जी ने पूरे विश्व में अमन और चैन किस तरीके से हासिल करने को कहा था?’ यह सुनकर रिया और फैजल के हाथ खड़े हो गए। अमन किन्हीं विचारों में खोया था। अमन का हाथ खड़ा न देखकर अमृता मैडम बोलीं, ‘क्या बात है अमन? क्या आज तुम्हारी तबियत ठीक नहीं है?’

मैडम की आवाज सुनकर अमन चैंक कर बोला, ‘नहीं…नहीं मैडम तबियत ठीक है ।’
‘फिर कहां खोए हुए थे? अच्छा चलो तुम ही बताओ कि गांधी जी ने पूरे विश्व में अमन और चैन का संदेश किस तरीके से दिया था?’ मैडम का प्रश्न सुनकर अमन बोला, ‘मैडम, गांधी जी ने अहिंसक तरीके से अमन और चैन प्राप्त करने पर जोर दिया था। वह हमेशा अहिंसा का मार्ग अपनाते थे और सभी को उसी मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करते थे।’ अमन के इतना बोलते ही अमृता मैडम बोलीं, ‘शाबास! तुमने बहुत अच्छा जवाब दिया है। गांधी जी आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके संदेश और उनकी सिखाई गई बातें आज भी नई पीढ़ी के लोगों को प्रेरणा देकर आगे बढ़ा रही हैं। हिंसा और लड़ाई-झगड़े से सिवा दुख व पीड़ा के कुछ नहीं मिलता है।’

यह सुनकर अमन को बहुत दुख हुआ। उसे रह-रह कर यह याद आ रहा था कि कितनी बेदर्दी से उसने फैजल की कॉपी के टुकड़े-टुकड़े कर उसकी मेहनत पर पानी फेर दिया है। यह गलती उसे कुछ और सोचने-समझने का मौका ही नहीं दे रही थी। मैडम की बातें सुनते-सुनते अचानक अमन जोर-जोर से रोने लगा। उसे रोते देखकर अमृता मैडम के साथ-साथ पूरी कक्षा के बच्चे भी हैरान हो गए। अमृता मैडम उसके पास आईं और बोलीं, ‘बेटा क्या हुआ? क्यों रो रहे हो?’ रिया और फैजल भी उसके करीब आ गए। फैजल बोला, ‘अमन अचानक ऐसा क्या हो गया? हमें बताओ। कोई परेशानी है तो सभी मिलकर उसका हल ढूंढेंगे।’ फैजल की बातें सुनकर अमन उसके गले लग गया और रोते-रोते बोला, ‘दोस्त, मुझे माफ कर दो। मुझसे बहुत बड़ी गलती हो गई है।’ फिर अमन ने रोते-रोते पूरी बात बताई। यह बात सुनकर अमृता मैडम, फैजल, रिया और पूरी कक्षा दंग रह गई। पर अमृता मैडम समझ गईं कि अमन को अपनी गलती का एहसास हो चुका है और यह गलती उसे सही दिशा में ले जाएगी।

फैजल अमन की हालत देखकर बोला, ‘दोस्त, तुमने अपनी गलती मान ली है। इसलिए मेरे मन में तुम्हारे लिए कोई गिला नहीं है।’ अमृता मैडम बोलीं, ‘अब परसों होने वाले नाटक में तुम गांधी जी की भूमिका के साथ सही मायनों में न्याय कर पाओगे।’ तभी रिया बोली, ‘पर मैडम चश्मा लगाए बिना यह गांधी जी की भूमिका के साथ न्याय कैसे कर पाएगा?’

फैजल हंसकर बोला, ‘गांधी जी बने अमन के लिए चश्मा मैं ले आऊं गा।’ इसके बाद सभी हंस पड़े। अमन बोला, ‘फैजल, तुम मेरी गणित की कॉपी की मदद से अपनी नई कॉपी बना लेना।’ इसके बाद फैजल और अमन एक-दूसरे के गले लग गए और पूरी कक्षा में तालियों की गूंज सुनाई देने लगी।

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