क्यों याद आ रहे हैं गुजरे जमाने

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-मुकेश कुमार-

इक जिद थी बड़े होने की लाखों कोशिशों के बाद

जब बड़े होने लगे अहसास हुआ की कुछ पीछे छूट रहा है।

बीते लम्हे याद आने लगे जब देखता हूं

खुद को पीछे मुड़कर इक कहानी नजर आती है।

कुछ पलों को बांटना चाहा कहां अब वो साथ ना रहा।

कुछ बिछड़ गए कुछ साथ रहें हमेशा जिन्दा रहेंगे मेरे साथ,

भूलकर भी भूलना चाहूं फिर ज्यादा याद आते है

वो बीते लम्हें वो गुजरा कल वो याद आता पल

अनजाने सफर के हमजोली मेरे यार मेरे दोस्त

वो जमाना गुजर गया तुम्हें देखें।।

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